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22 अक्टू. 2026•
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बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम

बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम

✍️ रिपोर्टर: Vishwanath Pratap Singh 🗓 03 सित. 2026, 09:20 AM 👁 57
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प्रधानमंत्री श्री मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रस्तुत किया छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल

संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है।

26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक

राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। साथ ही पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

भू-जल की स्थिति में सुधार के लिए राज्य में जल संचयन संरचनाओं के निर्माण के साथ पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण, जल संरचनाओं की मैपिंग और स्थानीय स्तर पर नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

‘जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के मंत्र को जमीन पर उतार रहा छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को छत्तीसगढ़ ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतारा है। प्रदेश की भौगोलिक विविधता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की आवश्यकता और जल उपलब्धता के अनुसार जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

राज्य का प्रयास है कि बारिश का अधिकतम पानी गांव और खेत की सीमा के भीतर ही रोका जाए। इससे न केवल भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सिंचाई, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों के लिए जल उपलब्धता को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के अपने अनुभवों, नवाचारों और सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

हर राज्य का हो अपना ‘कैच द रेन’ प्लान : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मेलन में देशभर में जल संरक्षण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा के स्वरूप, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। इससे जल संरक्षण के लिए राज्यवार स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति निर्धारित की जा सकेगी।

उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ प्रारंभ करने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने तथा अभियान की प्रगति की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में समीक्षा करने का भी सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी - इन तीनों के समन्वय से जल संरक्षण के प्रयासों को अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।

जल संरक्षण से खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी मॉडल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बारिश का पानी खेतों और गांवों में रोकने तथा उसे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में सुधार के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इसका सीधा लाभ खेती को मिल सकता है और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि और उससे जुड़े आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिल सकती है। गांवों में पेयजल स्रोतों की स्थिति बेहतर होने से परिवारों, विशेषकर महिलाओं को पानी जुटाने में लगने वाले समय और श्रम में भी कमी आ सकती है।

छत्तीसगढ़ का यह मॉडल बताता है कि जल संरक्षण केवल संरचनाओं के निर्माण का विषय नहीं है। यह सरकार, किसान, पंचायत और समाज की साझा जिम्मेदारी है। खेत का एक छोटा-सा हिस्सा पानी के लिए छोड़ने से शुरू हुई पहल भविष्य के लिए जल सुरक्षित करने के बड़े अभियान का आधार बन सकती है।

शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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