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30 जुल. 2026
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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राजेश खन्ना के आशिरवद को 'भूतिया' कहने पर रोक लगाई
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
मनोरंजन

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राजेश खन्ना के आशिरवद को 'भूतिया' कहने पर रोक लगाई

✍️ The Indian Express 🗓 30 जुल. 2026, 02:39 PM 👁 5

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राजेश खन्ना के आशिरवद को 'भूतिया' या 'शापित' कहने से मीडिया को रोका है।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राजेश खन्ना के पूर्व निवास आशिरवद को भूतिया या शापित कहने वाले मीडिया रिपोर्टों पर रोक लगा दी है। यह निर्णय उन कई समाचार पत्रों के बाद आया है, जिन्होंने इस घर को सनसनीखेज शब्दों में वर्णित किया था। न्यायालय का आदेश सभी प्रिंट, ऑनलाइन और प्रसारण माध्यमों को ऐसे शब्दों के उपयोग से रोकता है। यह निर्णय दिवंगत अभिनेता की विरासत की रक्षा और उनके परिवार की संपत्ति के अपमान को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।

न्यायालय का नोटिस मुंबई क्षेत्र में कार्यरत सभी मीडिया हाउसों को संबोधित किया गया, जिसमें उन्हें अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करने के कानूनी प्रभावों की याद दिलाई गई। यह निर्णय आशिरवद के स्वामित्व या स्थिति को प्रभावित नहीं करता, लेकिन सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकने वाले नकारात्मक वर्णनों के उपयोग को सीमित करता है। यह निर्णय जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देने में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है।

राजेश खन्ना, जो 2012 में निधन हो गया, भारतीय सिनेमा में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बने हुए हैं। बॉम्बे उच्च न्यायालय का यह निर्णय समान मामलों में एक मिसाल कायम कर सकता है, जहाँ मीडिया कवरेज अपमानजनक हो सकता है। यह आदेश तुरंत प्रभावी है और किसी भी उल्लंघन पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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