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01 नव. 2026•
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बलिया की गौरवशाली परंपरा: जननायक चंद्रशेखर जी की विरासत

✍️ रिपोर्टर: ANAND KUMAR PANDEY 🗓 01 नव. 2026, 09:25 PM 👁 22
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बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गाँव में जन्मे जननायक चंद्रशेखर जी ने भारत के संसद को अपनी ओजस्वी वाणी से हिला दिया, और उनकी विचारधारा आज भी बलिया की हवाओं में गूँजती है।

बलिया स्थापना दिवस पर मेरी कलम से ओजस्वी लाईन जो आजादी की पहली कहानी है बलिया ज़िला किसी परिचय का मोहताज नहीं यहीं क्रान्ति की ज्वाला भड़की जो अंग्रेजी हुकुमत को उखाड़ फेंकी। जब मैं पश्चिमी जनपदों और अन्य प्रदेशों की धरती पर जाता हूँ, तो अक्सर लोग पूछते हैं - आपका घर कहाँ है? मैं विनम्रता से कहता हूँ - बलिया। कुछ लोग अनभिज्ञता में कह उठते हैं - अच्छा, बिहार से? तब मैं मुस्कुराकर, गर्व के साथ कहता हूँ - नहीं बंधु, बिहार से नहीं। मैं उस बलिया से हूँ जो बागी है, जो कभी झुका नहीं। मैं उस पावन माटी से हूँ जिसने भारत माँ को उसका एक यशस्वी सपूत दिया - भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, जननायक चंद्रशेखर जी।

जिस बलिया की गोद में इब्राहिमपट्टी जैसा गाँव है, जहाँ एक गरीब किसान के घर में एक ऐसा बालक जन्मा, जिसने आगे चलकर इस देश की संसद को अपनी ओजस्वी वाणी से हिला दिया। जिसे संसद में 'यंग तुर्क' कहा गया, जो सत्ता की चकाचौंध में भी फकीरी में रहा, जिसने प्रधानमंत्री की कुर्सी को भी एक फकीर की तरह जिया, जिसने सत्ता नहीं, सिद्धांत की राजनीति की, जिसका सीना 8 बार बलिया की जनता के आशीर्वाद से संसद में गर्व से चौड़ा हुआ।

वो चंद्रशेखर जी, जो आज शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, पर जिनकी विचारधारा आज भी बलिया की हवाओं में गूँजती है। तो बंधु, मैं सिर्फ एक जिले से नहीं आता, मैं एक विचारधारा से आता हूँ। मैं एक इतिहास, एक संस्कार और एक गौरवशाली परम्परा से आता हूँ।

हाँ, मैं चंद्रशेखर जी वाले बलिया से हूँ। मुझे गर्व है कि मैं बलिया से हूँ।
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