शिक्षा
बैंकिंग तैयारी से विद्यालय अध्यापक: 12 वर्ष का संघर्ष, 2023 में साकार हुआ ख्वाब
2010 में IBPS की तैयारी से शुरू हुआ यह सफर, 2023 में 11-12 कक्षा के अकाउंटेंसी विषय के शिक्षक के रूप में चयन के साथ समाप्त हुआ।
2010 में COC शास्त्री चौक, दरभंगा में IBPS की तैयारी करते हुए, एक वरिष्ठ भैया ने मेरे बैच को गणित पढ़ाया। उनके बोर्ड पर प्रश्न हल करते हुए देख कर मेरे मन में एक छोटा सा ख्वाब जागा कि मैं भी एक दिन इस तरह पढ़ा पाऊँ और मेरे बैच में सैकड़ों बच्चे हों।
उस समय मैंने केवल दो महीने की तैयारी की थी और परीक्षा आ गई। मैं क्वालीफाई हुआ मगर कट‑ऑफ पार नहीं कर पाया। 2012 में पिताजी के देहांत के बाद पारिवारिक जीवन की कठिनाइयाँ बढ़ती गईं, और ख्वाब धीरे‑धीरे दूर होता गया। फिर भी मैंने ट्यूशन और कोचिंग शुरू की। 29 जून 2014 को मेरा पहला बैच 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ, और सभी फर्स्ट क्लास से पास हुए।
2017 में एक भी बच्चा 11वीं में नहीं आया, जिससे मैं थोड़ा टूट गया। फिर भी मैंने 2‑3 बच्चों के बैच के साथ सफर जारी रखा, नर्सरी से लेकर BCOM तक के छात्रों को होम ट्यूशन दिया और कॉमर्स कोचिंग भी चलाई। 16 नवंबर 2023 को मुझे 11‑12 कक्षा के अकाउंटेंसी विषय के विद्यालय अध्यापक के रूप में चयन मिला, जिससे 2011 में देखा गया ख्वाब 2023 में पूरा हुआ।
ख्वाब देखना आसान है, मगर उसे हर परिस्थिति में जीवित रखना और कुछ ना कर पाने की स्थिति में उसे ईश्वर को समर्पित करना कठिन होता है। इस लंबी यात्रा में असीम विश्वास ने मेरे ख्वाब को साकार किया। जय माता दी।
उस समय मैंने केवल दो महीने की तैयारी की थी और परीक्षा आ गई। मैं क्वालीफाई हुआ मगर कट‑ऑफ पार नहीं कर पाया। 2012 में पिताजी के देहांत के बाद पारिवारिक जीवन की कठिनाइयाँ बढ़ती गईं, और ख्वाब धीरे‑धीरे दूर होता गया। फिर भी मैंने ट्यूशन और कोचिंग शुरू की। 29 जून 2014 को मेरा पहला बैच 5 बच्चों के साथ शुरू हुआ, और सभी फर्स्ट क्लास से पास हुए।
2017 में एक भी बच्चा 11वीं में नहीं आया, जिससे मैं थोड़ा टूट गया। फिर भी मैंने 2‑3 बच्चों के बैच के साथ सफर जारी रखा, नर्सरी से लेकर BCOM तक के छात्रों को होम ट्यूशन दिया और कॉमर्स कोचिंग भी चलाई। 16 नवंबर 2023 को मुझे 11‑12 कक्षा के अकाउंटेंसी विषय के विद्यालय अध्यापक के रूप में चयन मिला, जिससे 2011 में देखा गया ख्वाब 2023 में पूरा हुआ।
ख्वाब देखना आसान है, मगर उसे हर परिस्थिति में जीवित रखना और कुछ ना कर पाने की स्थिति में उसे ईश्वर को समर्पित करना कठिन होता है। इस लंबी यात्रा में असीम विश्वास ने मेरे ख्वाब को साकार किया। जय माता दी।