📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Augustus Binu : flickr
स्थानीय
भाजपा के सुनील कोठारी ने जयपुर मेयर पद पर 89 वोटों से जीत दर्ज की
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 25 सित. 2026, 01:45 PM
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भाजपा के सुनील कोठारी ने 89 वोटों से जयपुर के मेयर पद पर जीत हासिल की, कांग्रेस प्रत्याशी को 60 वोट और NOTA को एक वोट मिला।
जयपुर नगर निगम ने मंगलवार को मेयर पद के चुनाव का आयोजन किया, जिसमें भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी ने 89 वोटों से जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी को 60 वोट मिले और NOTA को एक ही वोट मिला। 29 वोट के अंतर से कोठारी की जीत भाजपा की राजधानी में स्थानीय शासन पर पकड़ को दर्शाती है।
चुनाव अधिकारी ने नगर निगम के निर्वाचित परिषद सदस्यों के गुप्त मतदान के बाद परिणाम की पुष्टि की। यह परिणाम जयपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ दर्शाता है, जहाँ मेयर का कार्यालय अब राज्य सरकार की भाजपा प्रशासन के साथ निकटता से काम करेगा।
स्थानीय पार्टी नेताओं ने इस परिणाम की सराहना की, इसे शहर के विकास एजेंडा में मतदाताओं के भरोसे का संकेत बताया। नवनिर्वाचित मेयर इस सप्ताह के अंत में पदभार संभालेंगे और नगर सेवाओं, शहरी योजना और नागरिक परियोजनाओं की देखरेख करेंगे।
कांग्रेस ने हार स्वीकार करते हुए भी नई मेयर के साथ सहयोग की अपील की, ताकि शहरी चुनौतियों का समाधान किया जा सके। एक ही NOTA वोट परिषद में मतभेद की सूक्ष्म अभिव्यक्ति को दर्शाता है।
मेयर का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा, जिसके दौरान जयपुर की प्रशासनिक एजेंसियां बुनियादी ढाँचा सुधार, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
चुनाव अधिकारी ने नगर निगम के निर्वाचित परिषद सदस्यों के गुप्त मतदान के बाद परिणाम की पुष्टि की। यह परिणाम जयपुर के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ दर्शाता है, जहाँ मेयर का कार्यालय अब राज्य सरकार की भाजपा प्रशासन के साथ निकटता से काम करेगा।
स्थानीय पार्टी नेताओं ने इस परिणाम की सराहना की, इसे शहर के विकास एजेंडा में मतदाताओं के भरोसे का संकेत बताया। नवनिर्वाचित मेयर इस सप्ताह के अंत में पदभार संभालेंगे और नगर सेवाओं, शहरी योजना और नागरिक परियोजनाओं की देखरेख करेंगे।
कांग्रेस ने हार स्वीकार करते हुए भी नई मेयर के साथ सहयोग की अपील की, ताकि शहरी चुनौतियों का समाधान किया जा सके। एक ही NOTA वोट परिषद में मतभेद की सूक्ष्म अभिव्यक्ति को दर्शाता है।
मेयर का कार्यकाल पाँच वर्ष का होगा, जिसके दौरान जयपुर की प्रशासनिक एजेंसियां बुनियादी ढाँचा सुधार, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।