📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Filmkerala
राजनीति
एनआरसी और जनगणना पर भाजपा की दोहरी नीति पर उठी आलोचना
✍️ Imphal Times
🗓 20 अग. 2026, 03:36 AM
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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर की मांग में भाजपा का ज़ोर, चल रही जनगणना पर उसके नियंत्रण से विपरीत है, जिससे दोहरी नीति का आरोप लगा है।
नई दिल्ली – भाजपा पर दो प्रमुख राष्ट्रीय कार्यों के प्रति अपनी नीति में असंगति दिखाने का आरोप लगा है। जबकि पार्टी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने की बार-बार मांग कर रही है, वही देश की जनगणना का संचालन भी उसके हाथ में है, जिसमें विस्तृत जनसांख्यिकीय डेटा एकत्र किया जाता है।
आलोचक कहते हैं कि एनआरसी को लेकर भाजपा का सार्वजनिक ज़ोर, जनगणना के प्रबंधन से स्पष्ट रूप से विपरीत है। वे संकेत देते हैं कि इस दोहरी भूमिका से डेटा के उपयोग में पक्षपात और पारदर्शिता के प्रश्न उठ सकते हैं।
इम्फाल टाइम्स सहित कई क्षेत्रीय मीडिया ने इस स्थिति को भाजपा की “दोहरी नीति” के रूप में वर्णित किया है। अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा जनविश्वास को दोनों – एनआरसी और जनगणना – पर असर डाल सकता है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ जनसांख्यिकीय संतुलन संवेदनशील है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह आगामी संसद सत्रों में इस पर चर्चा करे।
यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों और निष्पक्ष जनसांख्यिकीय डेटा संग्रह के बीच संतुलन बनाने की व्यापक राजनीतिक चुनौती को उजागर करती है।
आलोचक कहते हैं कि एनआरसी को लेकर भाजपा का सार्वजनिक ज़ोर, जनगणना के प्रबंधन से स्पष्ट रूप से विपरीत है। वे संकेत देते हैं कि इस दोहरी भूमिका से डेटा के उपयोग में पक्षपात और पारदर्शिता के प्रश्न उठ सकते हैं।
इम्फाल टाइम्स सहित कई क्षेत्रीय मीडिया ने इस स्थिति को भाजपा की “दोहरी नीति” के रूप में वर्णित किया है। अभी तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा जनविश्वास को दोनों – एनआरसी और जनगणना – पर असर डाल सकता है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ जनसांख्यिकीय संतुलन संवेदनशील है। सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह आगामी संसद सत्रों में इस पर चर्चा करे।
यह बहस राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों और निष्पक्ष जनसांख्यिकीय डेटा संग्रह के बीच संतुलन बनाने की व्यापक राजनीतिक चुनौती को उजागर करती है।