📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann (talk)
राजनीति
बिहार ने नई कानूनी पैनल बनाई; ऊपरी जातियों का प्रभुत्व दलितों और मुसलमानों के लिए चिंता
✍️ IndiaTomorrow
🗓 19 सित. 2026, 11:36 PM
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बिहार ने नई कानूनी पैनल की घोषणा की, जिसका गठन ऊपरी जातियों की ओर झुका हुआ है, जिससे दलितों और मुसलमानों के बाहर रहने की चिंता जताई गई।
बिहार सरकार ने न्यायिक नियुक्तियों और अनुशासनात्मक मामलों की देखरेख के लिए एक नई कानूनी पैनल की स्थापना की है, जिससे नागरिक समाज समूहों ने कड़ी जाँच शुरू कर दी है।
घोषणा के अनुसार, पैनल में नौ सदस्य होंगे, जिनमें से छह ऊपरी जातियों के होंगे। शेष तीन सीटें निम्न जातियों और अल्पसंख्यक समूहों के प्रतिनिधियों के लिए रखी गई हैं, परंतु असंतुलन ने समावेशिता पर सवाल उठाए हैं।
सक्रियक और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संरचना दलितों और मुसलमानों को और अधिक हाशिये पर धकेल सकती है, जो पहले से ही राज्य के कानूनी संस्थानों में कम प्रतिनिधित्व का सामना करते हैं। वे चेतावनी देते हैं कि पैनल द्वारा लिए गए निर्णय न्याय तक पहुँच में मौजूदा असमानताओं को बढ़ा सकते हैं।
सरकार ने अभी तक इन चिंताओं का समाधान कैसे करेगी, इस पर प्रकाश नहीं डाला है, परंतु यह विवाद बिहार में सार्वजनिक निकायों में जातीय प्रतिनिधित्व पर व्यापक बहस को उजागर करता है।
घोषणा के अनुसार, पैनल में नौ सदस्य होंगे, जिनमें से छह ऊपरी जातियों के होंगे। शेष तीन सीटें निम्न जातियों और अल्पसंख्यक समूहों के प्रतिनिधियों के लिए रखी गई हैं, परंतु असंतुलन ने समावेशिता पर सवाल उठाए हैं।
सक्रियक और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संरचना दलितों और मुसलमानों को और अधिक हाशिये पर धकेल सकती है, जो पहले से ही राज्य के कानूनी संस्थानों में कम प्रतिनिधित्व का सामना करते हैं। वे चेतावनी देते हैं कि पैनल द्वारा लिए गए निर्णय न्याय तक पहुँच में मौजूदा असमानताओं को बढ़ा सकते हैं।
सरकार ने अभी तक इन चिंताओं का समाधान कैसे करेगी, इस पर प्रकाश नहीं डाला है, परंतु यह विवाद बिहार में सार्वजनिक निकायों में जातीय प्रतिनिधित्व पर व्यापक बहस को उजागर करता है।