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जहानाबाद: बेटे की निशानी बनी बहू, 21 लाख के विवाद का सुखद अंत
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Government of India
देश

जहानाबाद: बेटे की निशानी बनी बहू, 21 लाख के विवाद का सुखद अंत

✍️ Amar Ujala · Gaya 🗓 19 जून 2026, 10:32 PM 👁 35
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जहानाबाद के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिजनों ने 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर उपजे विवाद को समाप्त करते हुए, अपनी बहू श्रेया राय को ही बेटे की सबसे बड़ी निशानी मानकर स्वीकार कर लिया है।

बिहार के जहानाबाद में शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के परिवार ने सहायता राशि को लेकर चल रहे विवाद का समाधान कर लिया है। परिवार ने अब अपनी बहू श्रेया राय को अपने शहीद बेटे की सबसे कीमती निशानी के रूप में स्वीकार किया है।

इस निर्णय के साथ ही 21 लाख रुपये की सहायता राशि को लेकर चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया है। परिवार की यह सोच में बदलाव को दर्शाता है, जहाँ उन्होंने आर्थिक सहायता से अधिक बहू को महत्व दिया है।

परिवार का यह कदम भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है, खासकर बेटे की शहादत के बाद। श्रेया राय का स्वीकार किया जाना उनके बेटे की विरासत को आगे बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
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