📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Information and public relations department Govern
राजनीति
फरक्का जल संधि नवीकरण से पहले बिहार ने 2050 तक की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन माँगा
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 02 नव. 2026, 06:32 PM
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जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि फरक्का जल संधि बिहार को 73% जल नुकसान पहुंचा सकती है और नवीकरण से पहले 2050 तक की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन करने की मांग की।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने फरक्का जल संधि के बिहार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को उजागर किया, यह कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य को अपने जल का 73 % तक नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस संधि का नवीकरण दिसंबर 2026 में होने वाला है और इससे पहले 2050 तक की जल जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य है।
झा ने तर्क दिया कि वैज्ञानिक अध्ययन के बिना बिहार को जल की तीव्र कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार और अंतर‑राज्य जल प्रबंधन निकायों से तुरंत आधुनिक जलविज्ञान मॉडल और जलवायु पूर्वानुमान के आधार पर इस अध्ययन को शुरू करने का आग्रह किया।
उन्होंने बिहार के व्यापक जल‑अधिकार एजेंडा को दोहराते हुए कहा कि पुनःवार्ता में राज्य की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस आकलन से बातचीत के लिए ठोस डेटा मिलेगा और लाखों बिहारियों की आजीविका सुरक्षित रहेगी।
फरक्का बांध को लेकर बिहार और पड़ोसी राज्यों के बीच विवाद पुराना है, पर झा का यह कदम साक्ष्य‑आधारित वकालत की ओर संकेत करता है, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी की। 2050‑के लक्ष्य के साथ यह अध्ययन राज्य की जल‑सुरक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन सकता है।
केंद्र सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर अधिकारी संकेत दे रहे हैं कि नवीकरण प्रक्रिया में सभी संबंधित राज्यों के तकनीकी इनपुट को ध्यान में रखा जाएगा।
झा ने तर्क दिया कि वैज्ञानिक अध्ययन के बिना बिहार को जल की तीव्र कमी का सामना करना पड़ेगा, जिससे कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार और अंतर‑राज्य जल प्रबंधन निकायों से तुरंत आधुनिक जलविज्ञान मॉडल और जलवायु पूर्वानुमान के आधार पर इस अध्ययन को शुरू करने का आग्रह किया।
उन्होंने बिहार के व्यापक जल‑अधिकार एजेंडा को दोहराते हुए कहा कि पुनःवार्ता में राज्य की बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस आकलन से बातचीत के लिए ठोस डेटा मिलेगा और लाखों बिहारियों की आजीविका सुरक्षित रहेगी।
फरक्का बांध को लेकर बिहार और पड़ोसी राज्यों के बीच विवाद पुराना है, पर झा का यह कदम साक्ष्य‑आधारित वकालत की ओर संकेत करता है, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी की। 2050‑के लक्ष्य के साथ यह अध्ययन राज्य की जल‑सुरक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन सकता है।
केंद्र सरकार ने अभी तक इस मांग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर अधिकारी संकेत दे रहे हैं कि नवीकरण प्रक्रिया में सभी संबंधित राज्यों के तकनीकी इनपुट को ध्यान में रखा जाएगा।