📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
सरकारी योजना
बिहार कैबिनेट ने 2026 के लिए ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी
✍️ The Hindu
🗓 01 अक्टू. 2026, 06:01 AM
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बिहार राज्य कैबिनेट ने 2026 के लिए ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी दी, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
पटना, 1 अक्टूबर (द हिन्दू) – बिहार कैबिनेट ने 2026 में लागू होने वाली बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति को औपचारिक रूप से मंजूरी दी। यह निर्णय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया, जिससे राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा दिशा में प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।
नीति में सौर और पवन जैसे नवीकरणीय स्रोतों से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए ढांचा तैयार किया गया है। यह निजी एवं सार्वजनिक निवेशकों के लिए प्रोत्साहन, तेज़ मंजूरी प्रक्रिया और कार्बन‑मुक्त हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए संभावित सब्सिडी जैसी सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि यह पहल भारत के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास के साथ तालमेल रखती है। ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को विकसित करके बिहार जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने, कुशल रोजगार सृजन करने और क्षेत्रीय स्वच्छ‑ऊर्जा निर्यात केंद्र बनने की आशा रखता है।
कार्यान्वयन चरणबद्ध रूप से शुरू होगा, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाले जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शामिल होंगे। प्रगति की निगरानी के लिए एक विशेष कार्यबल गठित किया जाएगा और वार्षिक रूप से राज्य विधानसभा को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
नीति में सौर और पवन जैसे नवीकरणीय स्रोतों से ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए ढांचा तैयार किया गया है। यह निजी एवं सार्वजनिक निवेशकों के लिए प्रोत्साहन, तेज़ मंजूरी प्रक्रिया और कार्बन‑मुक्त हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए संभावित सब्सिडी जैसी सुविधाएँ प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि यह पहल भारत के राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्य और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास के साथ तालमेल रखती है। ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को विकसित करके बिहार जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने, कुशल रोजगार सृजन करने और क्षेत्रीय स्वच्छ‑ऊर्जा निर्यात केंद्र बनने की आशा रखता है।
कार्यान्वयन चरणबद्ध रूप से शुरू होगा, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाले जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शामिल होंगे। प्रगति की निगरानी के लिए एक विशेष कार्यबल गठित किया जाएगा और वार्षिक रूप से राज्य विधानसभा को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।