📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tuian Times
राजनीति
बिहार ने 2025 विधानसभा चुनावों से पहले 14 लाख मतदाता जोड़े
✍️ SabrangIndia
🗓 09 अक्टू. 2026, 09:01 PM
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बिहार चुनाव आयोग ने 14 लाख नए नामों को अतिरिक्त मतदाता सूची में शामिल किया, जिससे 2025 विधानसभा चुनावों में बाहर रह गए मतदाताओं को लेकर चिंता बढ़ी।
बिहार चुनाव आयोग ने कहा है कि नवीनतम सत्यापन प्रक्रिया के बाद 14 लाख मतदाताओं को अतिरिक्त मतदाता सूची (SIR) में शामिल किया गया है। यह अपडेट 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत व्यापक मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि घर-घर जाकर सत्यापन और पहले न पंजीकृत योग्य नागरिकों को शामिल करने का परिणाम है। फिर भी, नागरिक समाज संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि अभी भी कई संभावित मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं, जिससे डेटा संग्रह प्रक्रिया में खामियों का संकेत मिलता है।
आगे की संशोधन प्रक्रिया के दौरान आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन अपनी पंजीकरण स्थिति जांचें। सभी हितधारकों ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले इन चूकों को दूर करने की मांग की है, ताकि आगामी चुनाव में किसी को भी बहिष्कृत न किया जाए।
बिहार जैसे जनसंख्या वाले राज्य में सटीक मतदाता डेटाबेस बनाए रखना एक निरंतर चुनौती है, जहाँ जनसंख्या परिवर्तन और प्रवासन पैटर्न अक्सर सूची की सटीकता को प्रभावित करते हैं।
अधिकांश संशोधनों की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है और राजनीतिक दलों से भी अनुरोध किया गया है कि वे मतदाता जागरूकता अभियानों में सहयोग दें, ताकि 2025 के विधानसभा चुनावों में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि घर-घर जाकर सत्यापन और पहले न पंजीकृत योग्य नागरिकों को शामिल करने का परिणाम है। फिर भी, नागरिक समाज संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि अभी भी कई संभावित मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं, जिससे डेटा संग्रह प्रक्रिया में खामियों का संकेत मिलता है।
आगे की संशोधन प्रक्रिया के दौरान आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन अपनी पंजीकरण स्थिति जांचें। सभी हितधारकों ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले इन चूकों को दूर करने की मांग की है, ताकि आगामी चुनाव में किसी को भी बहिष्कृत न किया जाए।
बिहार जैसे जनसंख्या वाले राज्य में सटीक मतदाता डेटाबेस बनाए रखना एक निरंतर चुनौती है, जहाँ जनसंख्या परिवर्तन और प्रवासन पैटर्न अक्सर सूची की सटीकता को प्रभावित करते हैं।
अधिकांश संशोधनों की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है और राजनीतिक दलों से भी अनुरोध किया गया है कि वे मतदाता जागरूकता अभियानों में सहयोग दें, ताकि 2025 के विधानसभा चुनावों में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके।