📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Saddam Hussein
अपराध
बिहार: 50 साल पुरानी जमाबंदी में हेरफेर, पश्चिम चंपारण में अधिकारियों पर प्राथमिकी
✍️ Amar Ujala · Muzaffarpur
🗓 18 अक्टू. 2026, 02:36 AM
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पश्चिम चंपारण के बेतिया अंचल में 50 साल पुरानी जमाबंदी को बिना न्यायालय के आदेश शून्य कर दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज करने का आरोप लगा, जिससे अधिकारियों पर प्राथमिकी और डीएम‑एडीएम व सीओ को जवाब तलब किया गया।
पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया अंचल में 50 साल पुरानी जमाबंदी को बिना न्यायालय के आदेश के सिस्टम से हटाकर दूसरे व्यक्ति के नाम ऑनलाइन दर्ज करने का गंभीर आरोप लगा है। इस प्रकार की हेरफेर से भूमि‑रिकॉर्ड की स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है।
जब स्थानीय निवासियों और राजस्व अधिकारियों ने स्वामित्व की पुष्टि करने की कोशिश की, तो उन्हें इस असंगति का पता चला। शिकायत के अनुसार, मूल जमाबंदी को शून्य कर दिया गया और एक नई प्रविष्टि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर की गई, जिससे लेन‑देन की वैधता पर सवाल उठे।
पुलिस ने इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस FIR में जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और सर्कल अधिकारी को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर हेरफेर की व्याख्या करने का निर्देश दिया गया है।
यह घटना बिहार में भूमि‑रिकॉर्ड के डिजिटलकरण में मौजूद खामियों को उजागर करती है, जहाँ प्रक्रियात्मक चूक से संपत्ति अधिकारों में विवाद उत्पन्न हो सकते हैं और राजस्व प्रशासन में जनता का भरोसा कमज़ोर पड़ सकता है।
जब स्थानीय निवासियों और राजस्व अधिकारियों ने स्वामित्व की पुष्टि करने की कोशिश की, तो उन्हें इस असंगति का पता चला। शिकायत के अनुसार, मूल जमाबंदी को शून्य कर दिया गया और एक नई प्रविष्टि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर की गई, जिससे लेन‑देन की वैधता पर सवाल उठे।
पुलिस ने इस मामले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस FIR में जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और सर्कल अधिकारी को जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर हेरफेर की व्याख्या करने का निर्देश दिया गया है।
यह घटना बिहार में भूमि‑रिकॉर्ड के डिजिटलकरण में मौजूद खामियों को उजागर करती है, जहाँ प्रक्रियात्मक चूक से संपत्ति अधिकारों में विवाद उत्पन्न हो सकते हैं और राजस्व प्रशासन में जनता का भरोसा कमज़ोर पड़ सकता है।