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बिहार के बांका जिले में फर्जी शिक्षक मनोज कुमार को 30 वर्ष से अधिक नौकरी के बाद बर्खास्त
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शिक्षा विभाग ने बाराहाट प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत फर्जी शिक्षक मनोज कुमार को 30 से 32 वर्ष के फर्जीवाड़े के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया।
बिहार के बांका जिले के बाराहाट प्रखंड में शिक्षा विभाग ने एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करते हुए 30 से 32 वर्षों से नौकरी कर रहे फर्जी शिक्षक मनोज कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया।
मनोज कुमार, प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात थे, पर विभागीय जांच में यह खुलासा हुआ कि उन्होंने रांची (झारखंड) में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग करके तीन दशकों से अधिक समय से नौकरी कर रहा था।
जिला शिक्षा पदाधिकारी देवनारायण पंडित और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) संजय कुमार यादव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी कर उसे तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत की गई है।
विभाग द्वारा शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू होने पर मनोज कुमार से मैट्रिक-इंटर के प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा अन्य मूल दस्तावेज मांगे गए, पर वह संतोषजनक प्रमाण नहीं दे पाए। जांच टीम को उनके पते और दस्तावेजों में भारी विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई।
मनोज कुमार, प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात थे, पर विभागीय जांच में यह खुलासा हुआ कि उन्होंने रांची (झारखंड) में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का दुरुपयोग करके तीन दशकों से अधिक समय से नौकरी कर रहा था।
जिला शिक्षा पदाधिकारी देवनारायण पंडित और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) संजय कुमार यादव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी कर उसे तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत की गई है।
विभाग द्वारा शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन शुरू होने पर मनोज कुमार से मैट्रिक-इंटर के प्रवेश पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड तथा अन्य मूल दस्तावेज मांगे गए, पर वह संतोषजनक प्रमाण नहीं दे पाए। जांच टीम को उनके पते और दस्तावेजों में भारी विसंगतियां मिलीं, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई हुई।