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भोपाल: शिक्षक अभ्यर्थियों का 56वें दिन भी प्रदर्शन जारी, पदवृद्धि की मांग पर अड़े
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भोपाल में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का प्रदर्शन 56वें दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थी मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर रोक दिया।
भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थियों का अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन लगातार 56वें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी डीपीआई कार्यालय से मुख्यमंत्री निवास तक कूच करने निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोशनपुरा चौराहे पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान पुलिस ने कई अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर खजूरी सड़क थाने और महिला अभ्यर्थियों को रातीबड़ थाने भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में 3000 पद बढ़ाना और इसके लिए लिखित आदेश जारी करना शामिल है। साथ ही, वर्ग-3 में 25,000 पदों पर भर्ती की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों ने भविष्य चयन सूची और अतिरिक्त सूची को जल्द जारी करने की भी मांग की है। हाथों में तख्तियां और तिरंगा झंडा लिए अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसमें "एक कचौरी, दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा !" का नारा प्रमुखता से गूंजा।
हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्वक बैठे होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें बर्बरतापूर्वक बसों में भरकर ले गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी अधिकारियों को ज्ञापन दिया है और वे केवल प्रदेश के मुखिया से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट ऐलान किया है कि पदवृद्धि का लिखित आदेश जारी होने तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में 3000 पद बढ़ाना और इसके लिए लिखित आदेश जारी करना शामिल है। साथ ही, वर्ग-3 में 25,000 पदों पर भर्ती की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों ने भविष्य चयन सूची और अतिरिक्त सूची को जल्द जारी करने की भी मांग की है। हाथों में तख्तियां और तिरंगा झंडा लिए अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसमें "एक कचौरी, दो समोसा, शिक्षा मंत्री का क्या भरोसा !" का नारा प्रमुखता से गूंजा।
हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्वक बैठे होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें बर्बरतापूर्वक बसों में भरकर ले गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी अधिकारियों को ज्ञापन दिया है और वे केवल प्रदेश के मुखिया से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट ऐलान किया है कि पदवृद्धि का लिखित आदेश जारी होने तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा।