📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
राजनीति
बंगाल के सीएम अधिकारी ने पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए 'मुक्त हाथ' दिया
✍️ Deccan Herald
🗓 23 जुल. 2026, 09:48 AM
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बंगाल के मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को बिना किसी प्रतिबंध के अधिकार मिलेगा, जिससे लैंगिक आधारित हिंसा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।
गुरुवार को बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए घोषणा की कि राज्य पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए "मुक्त हाथ" दिया जाएगा। यह घोषणा राज्य में बढ़ती लैंगिक आधारित हिंसा के प्रति चिंताओं के बीच की गई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश पुलिस को बिना किसी प्रक्रियागत विलंब के निर्णायक कार्रवाई करने की अनुमति देता है, जिससे अपराधियों की त्वरित जांच और मुकदमा चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सुदृढ़ करने और संवेदनशील नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से लैंगिक-संवेदनशील पुलिसिंग पर प्रशिक्षण बढ़ाने और स्थानीय एनजीओ व पीड़ित सहायता समूहों के साथ समन्वय सुधारने का आग्रह किया। अतिरिक्त संसाधनों के साथ फोरेंसिक लैब्स और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों को सुदृढ़ करने का वादा भी किया।
हालांकि इस घोषणा का स्वागत महिलाओं के अधिकार संगठनों ने किया, कुछ आलोचकों का मानना है कि विस्तारित शक्तियों के साथ संस्थागत सुरक्षा उपाय भी होने चाहिए ताकि दुरुपयोग रोका जा सके। फिर भी सरकार ने कार्यान्वयन की करीबी निगरानी का वादा किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश पुलिस को बिना किसी प्रक्रियागत विलंब के निर्णायक कार्रवाई करने की अनुमति देता है, जिससे अपराधियों की त्वरित जांच और मुकदमा चलाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह कदम कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सुदृढ़ करने और संवेदनशील नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से लैंगिक-संवेदनशील पुलिसिंग पर प्रशिक्षण बढ़ाने और स्थानीय एनजीओ व पीड़ित सहायता समूहों के साथ समन्वय सुधारने का आग्रह किया। अतिरिक्त संसाधनों के साथ फोरेंसिक लैब्स और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों को सुदृढ़ करने का वादा भी किया।
हालांकि इस घोषणा का स्वागत महिलाओं के अधिकार संगठनों ने किया, कुछ आलोचकों का मानना है कि विस्तारित शक्तियों के साथ संस्थागत सुरक्षा उपाय भी होने चाहिए ताकि दुरुपयोग रोका जा सके। फिर भी सरकार ने कार्यान्वयन की करीबी निगरानी का वादा किया।