📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / BC NDP
राजनीति
बलतेज पन्नू ने चेतावनी दी, चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 से पंजाब के अधिकार घट सकते हैं
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 16 सित. 2026, 06:36 PM
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वरिष्ठ राजनेता बलतेज पन्नू ने चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 में प्रस्तावित बदलावों की आलोचना की, यह कहते हुए कि ये पंजाब के अधिकारों को कमज़ोर करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पंजाब के प्रमुख राजनेता बलतेज पन्नू ने चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 के मसौदे में प्रस्तावित बदलावों पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये संशोधन केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पंजाब के वैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
पन्नू के अनुसार, प्रस्तावित नियमावली में बदलाव धीरे‑धीरे उन विशेषाधिकारों और संसाधनों को घटा देंगे जो पंजाब को चंडीगढ़ में ऐतिहासिक रूप से प्राप्त हैं, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के क्रमिक परिवर्तन आगे के अधिकार छीनने की नींव रख सकते हैं।
यह बयान पंजाब के हितधारकों में बढ़ती चिंता के बीच आया है, जो केंद्र सरकार के अंतर‑राज्य समझौतों के प्रति रुख को लेकर चिंतित हैं। जबकि अधिकारियों ने अभी तक विशिष्ट संशोधनों का विवरण नहीं दिया है, उन्होंने कहा कि ये बदलाव चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से हैं।
पन्नू ने एक पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया की मांग की और सभी संबंधित राज्य और केंद्र प्राधिकरणों से पंजाब के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया, इससे पहले कि कोई विधायी कदम उठाया जाए।
पन्नू के अनुसार, प्रस्तावित नियमावली में बदलाव धीरे‑धीरे उन विशेषाधिकारों और संसाधनों को घटा देंगे जो पंजाब को चंडीगढ़ में ऐतिहासिक रूप से प्राप्त हैं, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के क्रमिक परिवर्तन आगे के अधिकार छीनने की नींव रख सकते हैं।
यह बयान पंजाब के हितधारकों में बढ़ती चिंता के बीच आया है, जो केंद्र सरकार के अंतर‑राज्य समझौतों के प्रति रुख को लेकर चिंतित हैं। जबकि अधिकारियों ने अभी तक विशिष्ट संशोधनों का विवरण नहीं दिया है, उन्होंने कहा कि ये बदलाव चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से हैं।
पन्नू ने एक पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया की मांग की और सभी संबंधित राज्य और केंद्र प्राधिकरणों से पंजाब के हितों की रक्षा करने का आग्रह किया, इससे पहले कि कोई विधायी कदम उठाया जाए।