📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Akku09102004
धर्म
जयपुर में धनतेरस की खरीदारी का शुभ समय घोषित
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 06 नव. 2026, 07:15 AM
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जयपुर में धनतेरस की खरीदारी का शुभ मुहूर्त शुक्रवार सुबह 10:31 बजे से शुरू होगा, जबकि लक्ष्मी‑कुबेर पूजन शाम 6:11 बजे से रात 8:07 बजे तक किया जाएगा।
जयपुर ने धनतेरस के अवसर पर आधिकारिक समय-सारणी जारी की है, जिसमें शुक्रवार सुबह 10:31 बजे से खरीदारी का शुभ मुहूर्त शुरू होगा। यह समय सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीद के लिए पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है।
खरीदारी के साथ ही लक्ष्मी‑कुबेर पूजन का समय भी निर्धारित किया गया है, जो शाम 6:11 बजे से रात 8:07 बजे तक किया जाएगा। इस पूजन से धन की देवी लक्ष्मी और समृद्धि के देवता कुबेर की कृपा प्राप्त करने की आशा की जाती है।
निवासियों को सलाह दी गई है कि वे इन समय‑सीमाओं के अनुसार अपनी खरीदारी और मंदिर यात्रा की योजना बनाएँ, ताकि शुभ मुहूर्त का पूर्ण लाभ उठा सकें। यह समय‑सारणी स्थानीय समाचार पत्र अमर उजाला ने आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित की।
व्यापारी इस अवधि में बढ़ती भीड़ की उम्मीद कर रहे हैं, और कई मंदिरों ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की है। स्पष्ट समय‑निर्धारण से बाजार में भीड़भाड़ कम करने और सहज आयोजन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह घोषणा पारम्परिक रीति‑रिवाजों को व्यवस्थित सार्वजनिक योजना के साथ जोड़ने के शहर के प्रयास को दर्शाती है, जिससे धनतेरस की सांस्कृतिक महत्ता सुरक्षित और सम्मानपूर्वक मनाई जा सके।
खरीदारी के साथ ही लक्ष्मी‑कुबेर पूजन का समय भी निर्धारित किया गया है, जो शाम 6:11 बजे से रात 8:07 बजे तक किया जाएगा। इस पूजन से धन की देवी लक्ष्मी और समृद्धि के देवता कुबेर की कृपा प्राप्त करने की आशा की जाती है।
निवासियों को सलाह दी गई है कि वे इन समय‑सीमाओं के अनुसार अपनी खरीदारी और मंदिर यात्रा की योजना बनाएँ, ताकि शुभ मुहूर्त का पूर्ण लाभ उठा सकें। यह समय‑सारणी स्थानीय समाचार पत्र अमर उजाला ने आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित की।
व्यापारी इस अवधि में बढ़ती भीड़ की उम्मीद कर रहे हैं, और कई मंदिरों ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की है। स्पष्ट समय‑निर्धारण से बाजार में भीड़भाड़ कम करने और सहज आयोजन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह घोषणा पारम्परिक रीति‑रिवाजों को व्यवस्थित सार्वजनिक योजना के साथ जोड़ने के शहर के प्रयास को दर्शाती है, जिससे धनतेरस की सांस्कृतिक महत्ता सुरक्षित और सम्मानपूर्वक मनाई जा सके।