📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / পৱন বৰ্মন
कृषि
असम में पहली IVF‑जन्मी लखिमी बछड़ा, सीएम सरमा ने कहा
✍️ Mid-Day
🗓 23 अग. 2026, 12:03 PM
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असम ने IVF के माध्यम से अपनी पहली लखिमी बछड़ी पैदा की, जिसे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऐतिहासिक बताया।
असम के पशु प्रजनन विभाग ने बताया कि लखिमी नस्ल की बछड़ी को इन‑विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) तकनीक से जन्म दिया गया, जिससे राज्य में इस विधि से मूल भारतीय मवेशी का पहला सफल प्रसव हुआ। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस उपलब्धि को मूल पशु आनुवंशिकी को सुदृढ़ करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
IVF प्रक्रिया सरकारी पशु पालन केंद्र में की गई, जहाँ एक दाता गाय से अंडाणु एकत्र कर प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ निषेचित किए गए और फिर भ्रूण को सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रकार जन्मी बछड़ी स्वस्थ है और स्थानीय नस्लों के दुग्ध उत्पादन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले प्रजनन कार्यक्रमों में उपयोगी होगी।
राज्य के अधिकारियों ने कहा कि यह सफलता विदेशी मिश्रित पशुओं पर निर्भरता कम कर, किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली मूल नस्ल प्रदान करके ग्रामीण आय में सुधार कर सकती है। आगे इस तकनीक को अन्य मूल नस्लों में भी लागू करने की योजना है।
यह कदम असम की कृषि नीति के साथ मेल खाता है, जिसका लक्ष्य जैव विविधता को संरक्षित करना और आधुनिक वैज्ञानिक उपायों से ग्रामीण जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है।
IVF प्रक्रिया सरकारी पशु पालन केंद्र में की गई, जहाँ एक दाता गाय से अंडाणु एकत्र कर प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ निषेचित किए गए और फिर भ्रूण को सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रकार जन्मी बछड़ी स्वस्थ है और स्थानीय नस्लों के दुग्ध उत्पादन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले प्रजनन कार्यक्रमों में उपयोगी होगी।
राज्य के अधिकारियों ने कहा कि यह सफलता विदेशी मिश्रित पशुओं पर निर्भरता कम कर, किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली मूल नस्ल प्रदान करके ग्रामीण आय में सुधार कर सकती है। आगे इस तकनीक को अन्य मूल नस्लों में भी लागू करने की योजना है।
यह कदम असम की कृषि नीति के साथ मेल खाता है, जिसका लक्ष्य जैव विविधता को संरक्षित करना और आधुनिक वैज्ञानिक उपायों से ग्रामीण जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है।