📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bill Ingalls
कृषि
असम में जन्मी पहली महिला आईवीएफ बछड़ी
✍️ Hub News
🗓 22 अग. 2026, 04:33 PM
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असम के वैज्ञानिकों ने आईवीएफ तकनीक से राज्य की पहली महिला बछड़ी का सफलतापूर्वक जन्म कराया, जो पशुपालन में एक महत्वपूर्ण कदम है।
असम के पशुधन विकास विभाग के वैज्ञानिकों ने आईवीएफ (इन‑विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से उत्पन्न पहली महिला बछड़ी का जन्म घोषित किया है। यह बछड़ी सरकारी प्रजनन फार्म में पैदा हुई है, जो राज्य में इस प्रकार की पहली सफलता है और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
आईवीएफ प्रक्रिया में एक दाता गाय से अंडाणु निकालकर उन्हें प्रयोगशाला में उच्च गुणवत्ता वाले शुक्राणु से निषेचित किया गया, फिर भ्रूण को सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया गया। लगभग नौ महीने की गर्भावस्था के बाद बछड़ी बिना किसी जटिलता के जन्मी।
अधिकारियों का कहना है कि इस सफलता से असम में उच्च उत्पादन वाली दुग्ध गायों की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि यह तकनीक श्रेष्ठ जीन वाले मादा पशुओं को प्रजनन में लाने की सुविधा देती है। अब इस विधि को अन्य प्रजनन केंद्रों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय किसानों को लाभ होगा।
यह परियोजना राज्य सरकार के वित्तीय समर्थन और पशु चिकित्सकों के सहयोग से चलाई गई है, जो कृषि में वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीएफ का व्यापक उपयोग पशुधन की गुणवत्ता में सुधार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देगा।
आईवीएफ प्रक्रिया में एक दाता गाय से अंडाणु निकालकर उन्हें प्रयोगशाला में उच्च गुणवत्ता वाले शुक्राणु से निषेचित किया गया, फिर भ्रूण को सरोगेट गाय में प्रत्यारोपित किया गया। लगभग नौ महीने की गर्भावस्था के बाद बछड़ी बिना किसी जटिलता के जन्मी।
अधिकारियों का कहना है कि इस सफलता से असम में उच्च उत्पादन वाली दुग्ध गायों की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि यह तकनीक श्रेष्ठ जीन वाले मादा पशुओं को प्रजनन में लाने की सुविधा देती है। अब इस विधि को अन्य प्रजनन केंद्रों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे दूध उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय किसानों को लाभ होगा।
यह परियोजना राज्य सरकार के वित्तीय समर्थन और पशु चिकित्सकों के सहयोग से चलाई गई है, जो कृषि में वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीएफ का व्यापक उपयोग पशुधन की गुणवत्ता में सुधार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में योगदान देगा।