📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rukateja
राजनीति
असम के सांसद बदरुद्दीन अजमल पर वोट के लिये देर‑रात मस्जिद यात्राओं का आरोप
✍️ India Today NE
🗓 04 अक्टू. 2026, 01:37 PM
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राजनीतिक विरोधियों का आरोप है कि असम के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने वोट हासिल करने के लिये देर‑रात मस्जिदों का दौरा किया है। इस बात ने चुनावी प्रचार में धर्म के प्रयोग को लेकर चर्चा छेड़ दी है।
असम के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने आरोप लगाया है कि बहुजन एकता दल के नेता और सांसद बदरुद्दीन अजमल देर‑रात मस्जिदों का दौरा कर रहे हैं। इन आरोपों के अनुसार, वह उपवास के शुरुआती समय में मस्जिदों में जाकर मतदाताओं को धार्मिक भावनाओं से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह आरोप आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सामने आया है, जिसमें विरोधियों का कहना है कि अजमल मुस्लिम समुदाय पर अपना प्रभाव इस्तेमाल कर वोटों को आकर्षित कर रहे हैं। वे तर्क देते हैं कि इस तरह का व्यवहार धर्म और राजनीति के बीच की सीमाओं को धुंधला कर देता है और भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध हो सकता है।
अजमल ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। चुनाव अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मुद्दे को कड़ी नजर से देखें और सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रकार की वोट‑बैंक राजनीति चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित न करे।
यह विवाद भारत में धर्म के राजनीति में भूमिका पर चल रहे राष्ट्रीय बहस को और तीव्र कर रहा है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय बड़ी संख्या में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक अपील आम है, परन्तु देर‑रात के इस प्रकार के दौरे की समयसारिणी और स्वरूप को अनुचित माना जा सकता है।
अधिकारी यह संकेत दे रहे हैं कि यदि चुनावी नियमों का उल्लंघन सिद्ध हुआ तो दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, परन्तु अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। चुनाव कैलेंडर के नजदीक आने के साथ यह मामला नज़र में बना रहेगा।
यह आरोप आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सामने आया है, जिसमें विरोधियों का कहना है कि अजमल मुस्लिम समुदाय पर अपना प्रभाव इस्तेमाल कर वोटों को आकर्षित कर रहे हैं। वे तर्क देते हैं कि इस तरह का व्यवहार धर्म और राजनीति के बीच की सीमाओं को धुंधला कर देता है और भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के विरुद्ध हो सकता है।
अजमल ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। चुनाव अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इस मुद्दे को कड़ी नजर से देखें और सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रकार की वोट‑बैंक राजनीति चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित न करे।
यह विवाद भारत में धर्म के राजनीति में भूमिका पर चल रहे राष्ट्रीय बहस को और तीव्र कर रहा है, विशेषकर उन राज्यों में जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय बड़ी संख्या में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक अपील आम है, परन्तु देर‑रात के इस प्रकार के दौरे की समयसारिणी और स्वरूप को अनुचित माना जा सकता है।
अधिकारी यह संकेत दे रहे हैं कि यदि चुनावी नियमों का उल्लंघन सिद्ध हुआ तो दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, परन्तु अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। चुनाव कैलेंडर के नजदीक आने के साथ यह मामला नज़र में बना रहेगा।