📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस शासन में नौकरी‑भुगतान पर सवाल उठाए
✍️ India Today NE
🗓 30 सित. 2026, 04:31 AM
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पिछले कांग्रेस सरकार के दौरान लोगों को नौकरी पाने के लिए पैसे देने की आवश्यकता पर सवाल उठाए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए पिछले कांग्रेस सरकार के दौरान नौकरी पाने के लिए पैसे देने की प्रथा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "कांग्रेस शासन में लोग बिना पैसे दिए नौकरी क्यों नहीं पा सके?" जिससे भर्ती में भ्रष्टाचार की संभावना का संकेत मिला।
यह टिप्पणी इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट ने रिपोर्ट की, जिसमें सीएम के शब्दों को उद्धृत किया गया है, पर कोई विशेष उदाहरण या आँकड़े नहीं दिए गए। सरमा ने किसी व्यक्ति या विभाग का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बयान राज्य में सार्वजनिक‑सेक्टर भर्ती की पारदर्शिता पर चल रहे राजनीतिक बहस को उजागर करता है।
विपक्षी नेताओं ने अभी तक इस टिप्पणी पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मुद्दा आगामी असम विधानसभा सत्र में चर्चा का विषय बन सकता है, जहाँ पूर्व सरकार की नीतियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की पारदर्शी भर्ती के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कड़ी निगरानी के उपायों का वादा किया, हालांकि इस बयान में ठोस नीति कदमों का उल्लेख नहीं किया गया।
इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट ने बताया कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्तर पर नौकरी घोटालों और मेरिट‑आधारित नियुक्तियों की आवश्यकता पर चल रही चर्चा के बीच आई है।
यह टिप्पणी इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट ने रिपोर्ट की, जिसमें सीएम के शब्दों को उद्धृत किया गया है, पर कोई विशेष उदाहरण या आँकड़े नहीं दिए गए। सरमा ने किसी व्यक्ति या विभाग का नाम नहीं लिया, लेकिन यह बयान राज्य में सार्वजनिक‑सेक्टर भर्ती की पारदर्शिता पर चल रहे राजनीतिक बहस को उजागर करता है।
विपक्षी नेताओं ने अभी तक इस टिप्पणी पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह मुद्दा आगामी असम विधानसभा सत्र में चर्चा का विषय बन सकता है, जहाँ पूर्व सरकार की नीतियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की पारदर्शी भर्ती के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और कड़ी निगरानी के उपायों का वादा किया, हालांकि इस बयान में ठोस नीति कदमों का उल्लेख नहीं किया गया।
इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट ने बताया कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्तर पर नौकरी घोटालों और मेरिट‑आधारित नियुक्तियों की आवश्यकता पर चल रही चर्चा के बीच आई है।