📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
विदेश
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने नेपाल में बाढ़ से फँसे नागरिकों को बचाने की योजना बताई
✍️ India Today NE
🗓 28 अग. 2026, 05:19 PM
👁 4
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि राज्य सरकार नेपाल की अधिकारियों के साथ मिलकर बाढ़ से फँसे असमियों को वापस लाने की कार्रवाई कर रही है।
भारी मानसून की वर्षा से नेपाल के कई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई है, जिससे सड़कें कट गईं और असम के कई भारतीय नागरिक दूरस्थ गाँवों में फँस गए हैं। स्थानीय राहत एजेंसियों के अनुसार, बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में पुल टूटने और परिवहन सेवाओं के बंद होने के कारण प्रभावित लोग घर वापस नहीं जा पा रहे हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में बताया कि राज्य सरकार ने नेपाल सरकार, काठमांडू में भारतीय दूतावास और विभिन्न आपदा‑राहत NGOs के साथ समन्वय करने के लिए एक विशेष टास्क‑फोर्स बनाया है। यह टास्क‑फोर्स अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित मार्गों के पुनः खुलने पर नागरिकों को सीमा पार ले जाने की व्यवस्था कर रहा है।
नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि वे फँसे असमी नागरिकों को भोजन, पानी और बुनियादी चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहे हैं और भारतीय पक्ष के साथ मिलकर बाढ़‑ग्रस्त सड़कों को साफ करने तथा बचाव अभियानों को सुगम बनाने के लिए सहयोग करेंगे।
असम में फँसे लोगों के परिवारों को सूचित किया गया है कि बाढ़ के पानी के घटने और सड़क मरम्मत की गति के अनुसार पुनर्वास प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं। राज्य सरकार ने 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन स्थापित की है जिससे रिश्तेदारों को प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी।
यह घटना प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमा‑पार सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है, जहाँ दोनों देशों ने फँसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए शीघ्र और मानवीय प्रतिक्रिया देने पर ज़ोर दिया है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में बताया कि राज्य सरकार ने नेपाल सरकार, काठमांडू में भारतीय दूतावास और विभिन्न आपदा‑राहत NGOs के साथ समन्वय करने के लिए एक विशेष टास्क‑फोर्स बनाया है। यह टास्क‑फोर्स अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित मार्गों के पुनः खुलने पर नागरिकों को सीमा पार ले जाने की व्यवस्था कर रहा है।
नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि वे फँसे असमी नागरिकों को भोजन, पानी और बुनियादी चिकित्सा देखभाल प्रदान कर रहे हैं और भारतीय पक्ष के साथ मिलकर बाढ़‑ग्रस्त सड़कों को साफ करने तथा बचाव अभियानों को सुगम बनाने के लिए सहयोग करेंगे।
असम में फँसे लोगों के परिवारों को सूचित किया गया है कि बाढ़ के पानी के घटने और सड़क मरम्मत की गति के अनुसार पुनर्वास प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं। राज्य सरकार ने 24 घंटे कार्यरत हेल्पलाइन स्थापित की है जिससे रिश्तेदारों को प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी।
यह घटना प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमा‑पार सहयोग के महत्व को रेखांकित करती है, जहाँ दोनों देशों ने फँसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए शीघ्र और मानवीय प्रतिक्रिया देने पर ज़ोर दिया है।