📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / RKTV News UP
अपराध
अशोक मित्तल ने जालंधर एलपीयू हिंसा को सुनियोजित साजिश बताया, दुष्कर्म नहीं हुआ कहा
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 30 सित. 2026, 09:36 PM
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अशोक मित्तल ने जालंधर के एलपीयू में हुई हिंसा को सुनियोजित साजिश कहा और दुष्कर्म की खबर को खारिज किया।
अशोक मित्तल ने स्थानीय मीडिया को बताया कि जालंधर में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हालिया हिंसा कोई अचानक उभरी घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने इस दौरान दुष्कर्म की खबर को पूरी तरह खारिज किया। मित्तल के इन बयानों का संदर्भ विश्वविद्यालय में हुई उथल‑पुथल के बाद चल रहे जांच कार्य से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मित्तल का कहना है कि इस उथल‑पुथल के पीछे राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रतिशोध की सम्भावना है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करना है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि अटकलों पर नहीं, बल्कि साजिश के पीछे के वास्तविक कर्ताओं को उजागर करने पर ध्यान दें।
कानूनी एजेंसियों ने घटनाक्रम की जाँच शुरू कर दी है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने का आह्वान किया है। मित्तल के बयानों ने इस मुद्दे को एक नई दिशा दी है, जिससे सबूत‑आधारित जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है; कुछ लोग मित्तल के दृष्टिकोण का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य किसी भी संभावित दुराचार की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। जांच के परिणामों की प्रतीक्षा में सभी पक्ष ठोस निष्कर्षों की आशा कर रहे हैं।
मित्तल का कहना है कि इस उथल‑पुथल के पीछे राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रतिशोध की सम्भावना है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करना है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि अटकलों पर नहीं, बल्कि साजिश के पीछे के वास्तविक कर्ताओं को उजागर करने पर ध्यान दें।
कानूनी एजेंसियों ने घटनाक्रम की जाँच शुरू कर दी है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने का आह्वान किया है। मित्तल के बयानों ने इस मुद्दे को एक नई दिशा दी है, जिससे सबूत‑आधारित जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है; कुछ लोग मित्तल के दृष्टिकोण का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य किसी भी संभावित दुराचार की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। जांच के परिणामों की प्रतीक्षा में सभी पक्ष ठोस निष्कर्षों की आशा कर रहे हैं।