स्थानीय
अशोकनगर से तबादले के बाद बालाघाट कलेक्टर बने आदित्य सिंह, जनता के सवाल अनसुलझे
IAS आदित्य सिंह को अशोकनगर कलेक्टर पद से हटाकर बालाघाट की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके बाद जनता आरोपों की निष्पक्ष जांच और तबादले के कारणों पर सवाल उठा रही है।
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की जनता अपने पूर्व कलेक्टर IAS आदित्य सिंह के तबादले को लेकर सवाल उठा रही है। उन पर लगे आरोपों के चलते उन्हें अशोकनगर कलेक्टर पद से हटाकर भोपाल में एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उन्हें बालाघाट जैसे महत्वपूर्ण जिले का कलेक्टर बनाया गया है।
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि आदित्य सिंह पर लगे आरोप इतने गंभीर थे, तो क्या उनकी निष्पक्ष जांच पूरी हुई? यदि आरोप साबित नहीं हुए, तो क्या उन्हें अशोकनगर से हटाना उचित था? और यदि सरकार ने उन्हें बालाघाट जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी सौंपी है, तो अशोकनगर से हटाने के फैसले के पीछे क्या वास्तविक कारण थे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला किसी अधिकारी के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का है। जनता यह जानना चाहती है कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई, क्या आरोप साबित हुए या केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। जब उन्हें दूसरे जिले में कलेक्टर बनाया जा सकता है, तो अशोकनगर से हटाने का असली कारण स्पष्ट होना चाहिए।
जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि आदित्य सिंह पर लगे आरोप इतने गंभीर थे, तो क्या उनकी निष्पक्ष जांच पूरी हुई? यदि आरोप साबित नहीं हुए, तो क्या उन्हें अशोकनगर से हटाना उचित था? और यदि सरकार ने उन्हें बालाघाट जैसे महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी सौंपी है, तो अशोकनगर से हटाने के फैसले के पीछे क्या वास्तविक कारण थे?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला किसी अधिकारी के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का है। जनता यह जानना चाहती है कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हुई, क्या आरोप साबित हुए या केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। जब उन्हें दूसरे जिले में कलेक्टर बनाया जा सकता है, तो अशोकनगर से हटाने का असली कारण स्पष्ट होना चाहिए।