🔥 TRENDING Investigation Launched into Death of P... Nobel Committee Announces 2023 Physics... शिवपुरी की कृष्णा कुशवाह ने 10 हजार रु... बिलौआ में गिट्टी के अवैध परिवहन पर 12... Smriti Mandhana Appointed New Captain... रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय नगर में सफा...
07 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
अस्तपाल परिसर में महिला शौचालय की हालत बदतर

अस्तपाल परिसर में महिला शौचालय की हालत बदतर

✍️ Reporter: Rajendra Kumar 🗓 23 Aug 2026, 10:52 AM 👁 143
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
नाचना जैसलमेर
अस्पताल परिसर में बदहाल महिला शौचालय: स्वच्छता अभियानों को ठेंगा, शराब की बोतलों और कचरे का बना अड्डा
​
​मुख्य बातें:
​अस्पताल परिसर में लाखों की लागत से ग्राम पंचायत द्वारा बनाया गया था महिला सामुदायिक शौचालय।
​रखरखाव के अभाव में शौचालय का एक हिस्सा कचरा स्टोर रूम में हुआ तब्दील।
​मौके पर बिखरी मिलीं शराब की खाली बोतलें, सुरक्षा और स्वच्छता पर उठे गंभीर सवाल।
​विस्तृत खबर:
​सरकारी दावों और स्वच्छता अभियानों के बीच एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल परिसर में ग्राम पंचायत द्वारा ग्रामीणों और महिला मरीजों की सुविधा के लिए निर्मित महिला सामुदायिक शौचालय आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस जगह को स्वच्छता और सुविधा का प्रतीक होना चाहिए था, वह अब असामाजिक तत्वों का अड्डा और कचरा घर बन चुका है।
​स्थानीय निवासियों और अस्पताल में आने वाले मरीजों का कहना है कि देख-रेख के अभाव में शौचालय पूरी तरह जर्जर हो चुका है। हद तो तब हो गई जब इसके एक भाग को कचरे के स्टोर रूम में बदल दिया गया। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि शौचालय के भीतर और आसपास शराब की खाली बोतलें बिखरी पड़ी हैं, जो यह साफ बयां करती हैं कि रात के अंधेरे में यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है।
​महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य से खिलवाड़
अस्पताल में इलाज कराने आने वाली महिला मरीजों और उनके तीमारदारों को शौचालय की इस दुर्दशा के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में फैली गंदगी से संक्रमण का खतरा तो बना ही रहता है, साथ ही शराब की बोतलों की मौजूदगी महिलाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है।
​"लाखों रुपये खर्च करके शौचालय तो बना दिया गया, लेकिन इसके रखरखाव की सुध किसी ने नहीं ली। इलाज कराने आने वाली महिलाओं को इस अव्यवस्था के कारण भारी मानसिक और शारीरिक तकलीफ झेलनी पड़ती है।" मुरलीधर चांडक स्थानीय ग्रामीण
​प्रशासनिक लापरवाही पर उठते सवाल
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की बदहाली ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की तुरंत जांच कराई जाए, शौचालय की साफ-सफाई कराकर इसे चालू स्थिति में लाया जाए और यहाँ शराब पीने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
📲Get App