📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ঈশান জ্যোতি বৰা
स्थानीय
अरुणाचल अधिकार निकाय ने स्थानीय लोगों का समर्थन, सियांग परियोजना सर्वेक्षण पर रोक की मांग
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 18 सित. 2026, 04:31 AM
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अरुणाचल प्रदेश के एक अधिकार निकाय ने सियांग नदी जलविद्युत परियोजना के विरोध में स्थानीय लोगों का समर्थन किया, सर्वेक्षण व ड्रिलिंग पर तुरंत रोक की मांग की।
अरुणाचल प्रदेश में कार्यरत एक अधिकार निकाय ने सियांग नदी जलविद्युत परियोजना के विरोध में स्थानीय लोगों की चिंताओं को सार्वजनिक रूप से समर्थन दिया है। इस निकाय ने राज्य सरकार से सभी चल रहे भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और ड्रिलिंग कार्यों को तुरंत रोकने का आग्रह किया है।
स्थानीय समुदाय का मानना है कि यह परियोजना नाज़ुक नदी पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित कर सकती है, जैव विविधता को खतरे में डाल सकती है और स्वदेशी जनसंख्या के विस्थापन का कारण बन सकती है। वे यह भी कह रहे हैं कि लोगों की सहमति और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन पर्याप्त रूप से नहीं किया गया है।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए अधिकार निकाय ने अरुणाचल प्रदेश प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन भेजा, जिसमें सभी फील्ड कार्यों को तब तक रोकने का अनुरोध किया गया है जब तक उचित मंजूरी नहीं मिलती और समुदाय की शिकायतें सुलझ नहीं जातीं। ज्ञापन में परियोजना की राष्ट्रीय पर्यावरण एवं जनजातीय कल्याण कानूनों के अनुपालन की भी समीक्षा मांगी गई है।
अब तक राज्य अधिकारियों ने इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि परियोजना के पक्षधर कहते हैं कि सर्वेक्षण परियोजना की व्यवहार्यता निर्धारित करने के लिये आवश्यक हैं। यह टकराव पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास योजनाओं और स्वदेशी अधिकारों के बीच बढ़ती टेंशन को उजागर करता है।
स्थानीय समुदाय का मानना है कि यह परियोजना नाज़ुक नदी पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित कर सकती है, जैव विविधता को खतरे में डाल सकती है और स्वदेशी जनसंख्या के विस्थापन का कारण बन सकती है। वे यह भी कह रहे हैं कि लोगों की सहमति और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन पर्याप्त रूप से नहीं किया गया है।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए अधिकार निकाय ने अरुणाचल प्रदेश प्रशासन को एक औपचारिक ज्ञापन भेजा, जिसमें सभी फील्ड कार्यों को तब तक रोकने का अनुरोध किया गया है जब तक उचित मंजूरी नहीं मिलती और समुदाय की शिकायतें सुलझ नहीं जातीं। ज्ञापन में परियोजना की राष्ट्रीय पर्यावरण एवं जनजातीय कल्याण कानूनों के अनुपालन की भी समीक्षा मांगी गई है।
अब तक राज्य अधिकारियों ने इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि परियोजना के पक्षधर कहते हैं कि सर्वेक्षण परियोजना की व्यवहार्यता निर्धारित करने के लिये आवश्यक हैं। यह टकराव पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास योजनाओं और स्वदेशी अधिकारों के बीच बढ़ती टेंशन को उजागर करता है।