📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avsnarayan
राजनीति
आंध्र प्रदेश‑तेलंगाना में नगार्जुना सागर जल रिलीज़ पर झड़प, केआरएमबी ने निर्णय स्थगित
✍️ The Times of India
🗓 27 अग. 2026, 02:03 AM
👁 6
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकारों के बीच नगार्जुना सागर जलाशय से पानी के रिलीज़ को लेकर मतभेद जारी है, जबकि केआरएमबी ने जल‑साझाकरण निर्णय को स्थगित कर दिया है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकारों के बीच नगार्जुना सागर जलाशय से पानी के रिलीज़ को लेकर नया टकराव शुरू हो गया है। दोनों राज्य एक‑दूसरे पर अधिक या कम पानी छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे नीचे बहने वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी पर असर पड़ सकता है।
नगार्जुना सागर, कृष्णा नदी पर स्थित एक बड़ा बांध, पहले से ही जल‑साझाकरण समझौतों में विवाद का केंद्र रहा है। जबकि पहले के समझौते में रिलीज़ की मात्रा निर्धारित की गई थी, अब दोनों राज्य अपनी‑अपनी कृषि और नागरिक जरूरतों के आधार पर अलग‑अलग मांगें रख रहे हैं।
कर्नाटक नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी), जो बेसिन के राज्यों के बीच जल‑विवाद सुलझाने का काम करता है, ने इस मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला स्थगित करने की घोषणा की। बोर्ड ने कहा कि पर्याप्त डेटा और आगे की बातचीत के बाद ही कोई निर्णय दिया जा सकेगा।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अधिकारियों ने कहा कि वे संवाद जारी रखेंगे और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने का प्रयास करेंगे, जबकि केआरएमबी की इस देरी से जल‑वितरण शेड्यूल में अनिश्चितता बनी हुई है।
इस विलंब के कारण दोनों राज्यों के डेल्टा क्षेत्रों में किसानों को समय पर सिंचाई पानी मिलने में कठिनाई हो सकती है, और बांध के जलविद्युत उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
नगार्जुना सागर, कृष्णा नदी पर स्थित एक बड़ा बांध, पहले से ही जल‑साझाकरण समझौतों में विवाद का केंद्र रहा है। जबकि पहले के समझौते में रिलीज़ की मात्रा निर्धारित की गई थी, अब दोनों राज्य अपनी‑अपनी कृषि और नागरिक जरूरतों के आधार पर अलग‑अलग मांगें रख रहे हैं।
कर्नाटक नदी प्रबंधन बोर्ड (केआरएमबी), जो बेसिन के राज्यों के बीच जल‑विवाद सुलझाने का काम करता है, ने इस मुद्दे पर अपना अंतिम फैसला स्थगित करने की घोषणा की। बोर्ड ने कहा कि पर्याप्त डेटा और आगे की बातचीत के बाद ही कोई निर्णय दिया जा सकेगा।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अधिकारियों ने कहा कि वे संवाद जारी रखेंगे और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने का प्रयास करेंगे, जबकि केआरएमबी की इस देरी से जल‑वितरण शेड्यूल में अनिश्चितता बनी हुई है।
इस विलंब के कारण दोनों राज्यों के डेल्टा क्षेत्रों में किसानों को समय पर सिंचाई पानी मिलने में कठिनाई हो सकती है, और बांध के जलविद्युत उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।