📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Saiphani02
राजनीति
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने तीन राजधानी योजना के सभी दावों को खारिज किया
✍️ Hindustan Times
🗓 27 सित. 2026, 09:16 AM
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आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की तीन राजधानी योजना को चुनौती देने वाले सभी याचिकाओं को निराधार ठहराया, जिससे सरकार को आगे बढ़ने की मंजूरी मिली।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने एक निर्णायक आदेश में कहा कि राज्य की तीन‑राजधानी योजना के खिलाफ दायर सभी याचिकाएँ निराधार पाई गई हैं। यह योजना, जिसमें अमरावती को विधायी राजधानी, विशाखापत्तनम को कार्यकारी केंद्र और कर्नूल को न्यायिक राजधानी निर्धारित किया गया है, 2020 में सरकार द्वारा घोषित विकास रणनीति का मुख्य भाग रही है।
27 सितंबर 2026 को जारी किए गए आदेश में वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक बेंच ने कहा कि प्रक्रियात्मक त्रुटियों से लेकर संवैधानिक उल्लंघन के आरोपों तक सभी आपत्तियों को ठोस सबूतों की कमी के कारण खारिज किया गया। कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि इस योजना को मंजूरी देने वाली विधायी प्रक्रिया मौजूदा कानूनों के अनुरूप थी, जिससे आपत्तियों का कोई आधार नहीं बचा।
यह निर्णय मुख्यमंत्री वाय.एस. जगन मोहन रेड्डी की सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी बाधा हटाता है, जिससे वह बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को आगे बढ़ा सके और बिना अतिरिक्त न्यायिक अड़चन के फंड आवंटित कर सके। विपक्षी नेताओं ने निराशा जताते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।
कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को राज्य की प्रशासनिक भूगोल तय करने की स्वायत्तता को सुदृढ़ करने वाला मानते हैं, और उल्लेख करते हैं कि भारत में कई अन्य राज्यों ने भी समान बहु‑राजधानी मॉडल अपनाए हैं। यह निर्णय तीनों निर्धारित शहरों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों को तेज करने की उम्मीद को बढ़ाता है।
निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र के हितधारकों ने स्पष्टता को सराहा है और अनुमान लगाया है कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और सार्वजनिक‑निजी भागीदारी ढाँचे के साथ निवेश में वृद्धि होगी।
27 सितंबर 2026 को जारी किए गए आदेश में वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक बेंच ने कहा कि प्रक्रियात्मक त्रुटियों से लेकर संवैधानिक उल्लंघन के आरोपों तक सभी आपत्तियों को ठोस सबूतों की कमी के कारण खारिज किया गया। कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि इस योजना को मंजूरी देने वाली विधायी प्रक्रिया मौजूदा कानूनों के अनुरूप थी, जिससे आपत्तियों का कोई आधार नहीं बचा।
यह निर्णय मुख्यमंत्री वाय.एस. जगन मोहन रेड्डी की सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी बाधा हटाता है, जिससे वह बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को आगे बढ़ा सके और बिना अतिरिक्त न्यायिक अड़चन के फंड आवंटित कर सके। विपक्षी नेताओं ने निराशा जताते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।
कानूनी विशेषज्ञ इस फैसले को राज्य की प्रशासनिक भूगोल तय करने की स्वायत्तता को सुदृढ़ करने वाला मानते हैं, और उल्लेख करते हैं कि भारत में कई अन्य राज्यों ने भी समान बहु‑राजधानी मॉडल अपनाए हैं। यह निर्णय तीनों निर्धारित शहरों में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों को तेज करने की उम्मीद को बढ़ाता है।
निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र के हितधारकों ने स्पष्टता को सराहा है और अनुमान लगाया है कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और सार्वजनिक‑निजी भागीदारी ढाँचे के साथ निवेश में वृद्धि होगी।