📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
आंध्र प्रदेश के सीएम YS जगेन मोहन रेड्डी ने सीईसी चयन में पारदर्शिता की माँग की
✍️ The Economic Times
🗓 19 अक्टू. 2026, 01:02 PM
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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री YS जगेन मोहन रेड्डी ने अगले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में पारदर्शी प्रक्रिया की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिससे चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री YS जगेन मोहन रेड्डी ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए अगले मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति में पारदर्शी और योग्यता‑आधारित प्रक्रिया अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता तभी बनी रहेगी जब सीईसी सभी राजनीतिक दलों का भरोसा जीत सके।
रेड्डी ने कहा कि यदि नियुक्ति में कोई भी अस्पष्टता या राजनीतिक हस्तक्षेप दिखे तो जनता का भरोसा कम हो सकता है, खासकर आगामी आम चुनावों के मद्देनज़र। उन्होंने स्पष्ट मानदंड, खुले शॉर्टलिस्टिंग और एक स्वतंत्र समिति की भागीदारी की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने किसी विशेष उम्मीदवार का उल्लेख नहीं किया, पर यह दोहराया कि चुनाव आयोग को बिना पक्षपात के काम करना चाहिए। यह टिप्पणी तब आई है जब वर्तमान सीईसी का कार्यकाल इस वर्ष के अंत में समाप्त होने वाला है, जिससे संसद और वरिष्ठ अधिकारियों में उत्तराधिकार के बारे में चर्चा चल रही है।
केन्द्र सरकार ने अभी तक नियुक्ति की समयसीमा नहीं बताई है, पर रेड्डी के बयान से सार्वजनिक जांच के साथ प्रक्रिया को तेज़ करने का दबाव बढ़ रहा है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता को सुरक्षित रखना है।
रेड्डी ने कहा कि यदि नियुक्ति में कोई भी अस्पष्टता या राजनीतिक हस्तक्षेप दिखे तो जनता का भरोसा कम हो सकता है, खासकर आगामी आम चुनावों के मद्देनज़र। उन्होंने स्पष्ट मानदंड, खुले शॉर्टलिस्टिंग और एक स्वतंत्र समिति की भागीदारी की वकालत की।
मुख्यमंत्री ने किसी विशेष उम्मीदवार का उल्लेख नहीं किया, पर यह दोहराया कि चुनाव आयोग को बिना पक्षपात के काम करना चाहिए। यह टिप्पणी तब आई है जब वर्तमान सीईसी का कार्यकाल इस वर्ष के अंत में समाप्त होने वाला है, जिससे संसद और वरिष्ठ अधिकारियों में उत्तराधिकार के बारे में चर्चा चल रही है।
केन्द्र सरकार ने अभी तक नियुक्ति की समयसीमा नहीं बताई है, पर रेड्डी के बयान से सार्वजनिक जांच के साथ प्रक्रिया को तेज़ करने का दबाव बढ़ रहा है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता को सुरक्षित रखना है।