📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Meyer
राजनीति
गोकुळ चुनाव में 200 करोड़ की निजीकरण पेशकश पर जानकर का आरोप
✍️ News18 Marathi
🗓 04 अक्टू. 2026, 12:16 PM
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गोकुळ चुनाव के दौरान यह दावा सामने आया है कि टाउन को निजीकरण करने के लिये 200 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, जिसका आरोप जानकर ने लगाया है।
गोकुळ विधानसभा क्षेत्र, जो वर्तमान राज्य चुनावों का प्रमुख केंद्र है, में एक तीव्र बहस छिड़ गई है जब यह दावा किया गया कि टाउन के सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के लिये 200 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। यह आरोप राजनीतिक कार्यकर्ता जानकर ने सार्वजनिक किया, जिन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव टाउन के प्रमुख सुविधाओं के निजीकरण को आसान बनाने के लिये था।
जानकर, जो पारदर्शिता के मंच पर चुनाव लड़ रहे हैं, ने कहा कि इस तरह का सौदा स्थानीय शासन को कमजोर करेगा और कुछ निवेशकों को लाभान्वित करेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच करने और पेशकश की वास्तविकता सत्यापित करने के लिये सार्वजनिक जांच की मांग की।
अब तक चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, और 200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पेशकश का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह विवाद अभियान में नई परत जोड़ रहा है, जहाँ विरोधी दल स्पष्टता की मांग कर रहे हैं, जबकि वर्तमान सरकार के समर्थक कहते हैं कि ये आरोप राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं।
मतदान के निकट आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय मीडिया में प्रमुखता से छाया रहेगा, क्योंकि मतदाता इस बड़े पैमाने पर निजीकरण के सार्वजनिक सेवाओं और सामुदायिक कल्याण पर संभावित प्रभाव को लेकर विचार करेंगे।
स्थानीय व्यापार समूह और नागरिक समाज संगठनों ने पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की है, यह रेखांकित करते हुए कि टाउन की संपत्तियों पर कोई भी निर्णय सार्वजनिक हित में और पूरी जवाबदेही के साथ होना चाहिए।
जानकर, जो पारदर्शिता के मंच पर चुनाव लड़ रहे हैं, ने कहा कि इस तरह का सौदा स्थानीय शासन को कमजोर करेगा और कुछ निवेशकों को लाभान्वित करेगा। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले की जांच करने और पेशकश की वास्तविकता सत्यापित करने के लिये सार्वजनिक जांच की मांग की।
अब तक चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, और 200 करोड़ रुपये की प्रस्तावित पेशकश का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह विवाद अभियान में नई परत जोड़ रहा है, जहाँ विरोधी दल स्पष्टता की मांग कर रहे हैं, जबकि वर्तमान सरकार के समर्थक कहते हैं कि ये आरोप राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं।
मतदान के निकट आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय मीडिया में प्रमुखता से छाया रहेगा, क्योंकि मतदाता इस बड़े पैमाने पर निजीकरण के सार्वजनिक सेवाओं और सामुदायिक कल्याण पर संभावित प्रभाव को लेकर विचार करेंगे।
स्थानीय व्यापार समूह और नागरिक समाज संगठनों ने पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की है, यह रेखांकित करते हुए कि टाउन की संपत्तियों पर कोई भी निर्णय सार्वजनिक हित में और पूरी जवाबदेही के साथ होना चाहिए।