📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vroomtrapit at English Wikipedia
अपराध
अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने 16 करोड़ के साइबर धोखाधड़ी मामले में जमानत अस्वीकृत की
✍️ The Indian Express
🗓 22 अग. 2026, 10:13 AM
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अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने 16 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी के आरोपी को जमानत नहीं दी, साइबर अपराध को “साइलेंट वायरस” कहा।
अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को 16 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपी को जमानत नहीं दी। अदालत ने यह आदेश देते हुए कहा कि साइबर अपराध "साइलेंट वायरस" की तरह है, जो अनदेखा रहकर बड़े वित्तीय नुकसान पहुंचाता है।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, आरोपी ने फ़िशिंग ई‑मेल और नकली वेबसाइटों के ज़रिए कई राज्यों के व्यक्तियों और कंपनियों को धोखा देकर बड़ी रकम निकालने का जाल बुनाया था। अभियोजन पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफ़र और डिजिटल ट्रेस की पेशकश की, जिससे अवैध धन के प्रवाह का पता चला।
जमानत अस्वीकृत करने का कारण अपराध की गंभीरता, बड़े पैमाने पर धन की मात्रा और साक्ष्य में छेड़छाड़ की संभावना को अदालत ने बताया। आरोपी को आगे की सुनवाई तक हिरासत में रखा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उच्च मूल्य वाले साइबर स्कैम्स के प्रति न्यायपालिका की बढ़ती चिंता को दर्शाता है और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह मामला भारत में भविष्य के साइबर‑संबंधी वित्तीय अपराधों के निपटारे में एक मिसाल बन सकता है।
जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल द्वारा जारी है, जिसने जनता से ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।
कोर्ट के दस्तावेज़ों के अनुसार, आरोपी ने फ़िशिंग ई‑मेल और नकली वेबसाइटों के ज़रिए कई राज्यों के व्यक्तियों और कंपनियों को धोखा देकर बड़ी रकम निकालने का जाल बुनाया था। अभियोजन पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफ़र और डिजिटल ट्रेस की पेशकश की, जिससे अवैध धन के प्रवाह का पता चला।
जमानत अस्वीकृत करने का कारण अपराध की गंभीरता, बड़े पैमाने पर धन की मात्रा और साक्ष्य में छेड़छाड़ की संभावना को अदालत ने बताया। आरोपी को आगे की सुनवाई तक हिरासत में रखा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उच्च मूल्य वाले साइबर स्कैम्स के प्रति न्यायपालिका की बढ़ती चिंता को दर्शाता है और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह मामला भारत में भविष्य के साइबर‑संबंधी वित्तीय अपराधों के निपटारे में एक मिसाल बन सकता है।
जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल द्वारा जारी है, जिसने जनता से ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।