📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / News18 MP Chhattisgarh
स्थानीय
आलीराजपुर पटवारी संघ ने भूमि अभिलेख सुधार में निष्पादक की भूमिका पर हड़ताल की चेतावनी
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 15 सित. 2026, 03:31 PM
👁 17
आलीराजपुर पटवारी संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन‑2026 योजना में निष्पादक की जिम्मेदारी को लेकर विरोध जताया और 15 सितंबर से बंदी की चेतावनी दी।
आलीराजपुर के पटवारी संघ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन‑2026 योजना में निष्पादक को दी गई भूमिका पर आपत्ति जताई गई है। संघ का कहना है कि इस योजना में पटवारी को ऐसे दस्तावेज़ों पर ई‑सिग्नेचर करने का बोझ दिया गया है, जिनकी वास्तविक मालिक वे नहीं हैं, जिससे कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यह योजना राज्य भर में भूमि‑स्वामित्व दस्तावेज़ों को डिजिटल करने और प्रक्रिया को तेज़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसमें निष्पादक को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सत्यता की पुष्टि करनी होती है। पटवारी इस बात से असहमत हैं कि उन्हें ऐसे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने का दायित्व दिया गया है, जबकि वे स्वयं जमीन के मालिक नहीं होते।
इन आपत्तियों के मद्देनज़र, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 15 सितंबर से वे अपना कार्य बंद कर देंगे और सरकार पर दबाव बनाने के लिए बंदी का इरादा जताया है। ज्ञापन में निष्पादक की जिम्मेदारियों में स्पष्टता और प्रक्रिया में संशोधन की मांग की गई है।
यदि यह हड़ताल लागू होती है, तो आलिराजपुर में नियमित भूमि‑रिकॉर्ड सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्थानीय किसानों और अन्य हितधारकों के लेन‑देन पर असर पड़ेगा।
यह योजना राज्य भर में भूमि‑स्वामित्व दस्तावेज़ों को डिजिटल करने और प्रक्रिया को तेज़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसमें निष्पादक को इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सत्यता की पुष्टि करनी होती है। पटवारी इस बात से असहमत हैं कि उन्हें ऐसे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने का दायित्व दिया गया है, जबकि वे स्वयं जमीन के मालिक नहीं होते।
इन आपत्तियों के मद्देनज़र, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 15 सितंबर से वे अपना कार्य बंद कर देंगे और सरकार पर दबाव बनाने के लिए बंदी का इरादा जताया है। ज्ञापन में निष्पादक की जिम्मेदारियों में स्पष्टता और प्रक्रिया में संशोधन की मांग की गई है।
यदि यह हड़ताल लागू होती है, तो आलिराजपुर में नियमित भूमि‑रिकॉर्ड सेवाओं में बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे स्थानीय किसानों और अन्य हितधारकों के लेन‑देन पर असर पड़ेगा।