📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumita Roy Dutta
स्वास्थ्य
वायु प्रदूषण को पैंक्रियास तक पहुँचने का प्रमाण मिला
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 05 नव. 2026, 07:20 PM
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वैज्ञानिकों ने बताया कि दिल्ली के धुंध में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों से आगे पैंक्रियास तक पहुँचकर नई स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकते हैं।
एक नवीन वैज्ञानिक अध्ययन ने यह उजागर किया है कि दिल्ली के धुंध में मौजूद सूक्ष्म कण केवल श्वसन तंत्र तक सीमित नहीं रहते। शोधकर्ताओं ने पाया कि ये कण रक्तप्रवाह के माध्यम से पैंक्रियास तक पहुँचकर उसकी कार्यप्रणाली को बाधित कर सकते हैं।
यह खोज वायु प्रदूषण के पहले से ज्ञात श्वसन‑हृदय संबंधी जोखिमों से परे नई स्वास्थ्य‑समस्याओं को उजागर करती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर संपर्क से मेटाबोलिक रोगों, विशेषकर मधुमेह, का जोखिम बढ़ सकता है, परन्तु सटीक जोखिम का निर्धारण अभी आगे के शोध पर निर्भर है।
दिल्ली के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने वायु‑गुणवत्ता सुधार हेतु कड़े उत्सर्जन नियंत्रण और व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिये। यह अध्ययन फेफड़ों के साथ‑साथ अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रदूषण से बचाने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
नई साक्ष्य को देखते हुए प्राधिकरण मौजूदा प्रदूषण‑नियंत्रण रणनीतियों की पुनः समीक्षा करेंगे, जिसका लक्ष्य शहर में हानिकारक कणों की सांद्रता को घटाना है।
इस बीच, नागरिकों को पीक स्मॉग समय में बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और प्रमाणित मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी गई है, जिससे व्यापक रोकथाम उपायों का हिस्सा बन सकें।
यह खोज वायु प्रदूषण के पहले से ज्ञात श्वसन‑हृदय संबंधी जोखिमों से परे नई स्वास्थ्य‑समस्याओं को उजागर करती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर संपर्क से मेटाबोलिक रोगों, विशेषकर मधुमेह, का जोखिम बढ़ सकता है, परन्तु सटीक जोखिम का निर्धारण अभी आगे के शोध पर निर्भर है।
दिल्ली के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने वायु‑गुणवत्ता सुधार हेतु कड़े उत्सर्जन नियंत्रण और व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिये। यह अध्ययन फेफड़ों के साथ‑साथ अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रदूषण से बचाने की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
नई साक्ष्य को देखते हुए प्राधिकरण मौजूदा प्रदूषण‑नियंत्रण रणनीतियों की पुनः समीक्षा करेंगे, जिसका लक्ष्य शहर में हानिकारक कणों की सांद्रता को घटाना है।
इस बीच, नागरिकों को पीक स्मॉग समय में बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और प्रमाणित मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी गई है, जिससे व्यापक रोकथाम उपायों का हिस्सा बन सकें।