📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dr.saptarshi
स्वास्थ्य
AIIMS ने बीपीएल को स्तन कैंसर की जल्दी पहचान के लिए एआई तकनीक सौंपी
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 17 सित. 2026, 11:01 PM
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AIIMS ने स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान हेतु विकसित एआई प्रणाली को व्यावसायिक उपयोग के लिए बीपीएल को सौंप दिया है।
दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS) ने स्तन कैंसर की शीघ्र पहचान के लिए एक एआई‑आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है, जो मैमोग्राम का विश्लेषण कर संभावित कैंसर मामलों को पारंपरिक तरीकों से जल्दी पहचानता है। व्यापक क्लिनिकल परीक्षणों के बाद इस तकनीक को बीपीएल को सौंप दिया गया है, ताकि इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन और मौजूदा निदान प्रक्रियाओं में शामिल किया जा सके।
AIIMS के अधिकारियों ने बताया कि यह एआई मॉडल हजारों इमेजिंग डेटा पर प्रशिक्षित है और पायलट अध्ययन में उच्च संवेदनशीलता व विशिष्टता दिखा चुका है, जिससे फॉल्स‑नेगेटिव दर में उल्लेखनीय कमी आई है। इस सहयोग का लक्ष्य इस उपकरण को सस्ते दामों पर पूरे देश के अस्पतालों, विशेषकर टियर‑2 और टियर‑3 क्षेत्रों में उपलब्ध कराना है, जहाँ रेडियोलॉजिस्ट की कमी है।
बीपीएल इस समाधान को सॉफ़्टवेयर‑एज़‑ए‑सर्विस (SaaS) रूप में अगले कुछ महीनों में लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर क्लाउड‑आधारित पहुँच प्राप्त कर सकें। दोनों पक्षों ने कहा कि यह तकनीक रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिस्थापित नहीं, बल्कि उनका सहयोग करेगी, जिससे शुरुआती पहचान में सुधार और भारतीय महिलाओं के उपचार परिणाम बेहतर होंगे।
यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों को बढ़ावा देने के सरकारी लक्ष्य के साथ मेल खाती है और स्तन कैंसर मृत्यु दर को कम करने में योगदान दे सकती है, जो अभी भी भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
AIIMS के अधिकारियों ने बताया कि यह एआई मॉडल हजारों इमेजिंग डेटा पर प्रशिक्षित है और पायलट अध्ययन में उच्च संवेदनशीलता व विशिष्टता दिखा चुका है, जिससे फॉल्स‑नेगेटिव दर में उल्लेखनीय कमी आई है। इस सहयोग का लक्ष्य इस उपकरण को सस्ते दामों पर पूरे देश के अस्पतालों, विशेषकर टियर‑2 और टियर‑3 क्षेत्रों में उपलब्ध कराना है, जहाँ रेडियोलॉजिस्ट की कमी है।
बीपीएल इस समाधान को सॉफ़्टवेयर‑एज़‑ए‑सर्विस (SaaS) रूप में अगले कुछ महीनों में लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिससे क्लीनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर क्लाउड‑आधारित पहुँच प्राप्त कर सकें। दोनों पक्षों ने कहा कि यह तकनीक रेडियोलॉजिस्ट को प्रतिस्थापित नहीं, बल्कि उनका सहयोग करेगी, जिससे शुरुआती पहचान में सुधार और भारतीय महिलाओं के उपचार परिणाम बेहतर होंगे।
यह पहल डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों को बढ़ावा देने के सरकारी लक्ष्य के साथ मेल खाती है और स्तन कैंसर मृत्यु दर को कम करने में योगदान दे सकती है, जो अभी भी भारत में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।