📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kurjan Bhatt
मनोरंजन
राजेश तैलंग ने मिर्ज़ापुर से पहले 10 साल की संघर्ष यात्रा पर विचार किया
✍️ The Times of India
🗓 22 सित. 2026, 07:09 AM
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राजेश तैलंग ने मिर्ज़ापुर से पहले के दस साल के संघर्ष का जिक्र किया, और बताया कि टीवी धारावाहिकों को वह “अखबार” समझते थे, जबकि अब सब कुछ डिजिटल हो गया है।
विनीत अभिनेता राजेश तैलंग ने मिर्ज़ापुर में अपनी भूमिका मिलने से पहले के दस साल के कठिन सफ़र के बारे में बताया। वह कहते हैं कि उन वर्षों में लगातार ऑडिशन और छोटे‑छोटे कामों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिली।
तैलंग ने कहा कि उस दौर में टीवी धारावाहिकों को वह "अखबार" की तरह देखते थे—रोज़ाना दर्शकों को सामग्री प्रदान करते थे, पर कलाकारों के लिए रचनात्मक अवसर सीमित थे। आज के डिजिटल युग में दर्शकों का ध्यान ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की ओर बदल गया है, जिससे नई संभावनाएँ खुल रही हैं।
इन विचारों से भारतीय मीडिया परिदृश्य के परिवर्तन का स्पष्ट चित्र मिलता है, जहाँ स्ट्रीमिंग सेवाओं ने पारंपरिक टीवी पर निर्भर कलाकारों के करियर पथ को बदल दिया है।
मिर्ज़ापुर की लगातार ऊँची रेटिंग्स के साथ, तैलंग का यह बयान उनके पेशेवर संघर्ष को उजागर करता है, जो अब एक लोकप्रिय श्रृंखला के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है।
अभिनेताओं के लिए यह कहानी दृढ़ता और धैर्य का संदेश देती है, जो पारंपरिक टेलीविजन से डिजिटल युग में सफल संक्रमण का प्रतीक बन गई है।
तैलंग ने कहा कि उस दौर में टीवी धारावाहिकों को वह "अखबार" की तरह देखते थे—रोज़ाना दर्शकों को सामग्री प्रदान करते थे, पर कलाकारों के लिए रचनात्मक अवसर सीमित थे। आज के डिजिटल युग में दर्शकों का ध्यान ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की ओर बदल गया है, जिससे नई संभावनाएँ खुल रही हैं।
इन विचारों से भारतीय मीडिया परिदृश्य के परिवर्तन का स्पष्ट चित्र मिलता है, जहाँ स्ट्रीमिंग सेवाओं ने पारंपरिक टीवी पर निर्भर कलाकारों के करियर पथ को बदल दिया है।
मिर्ज़ापुर की लगातार ऊँची रेटिंग्स के साथ, तैलंग का यह बयान उनके पेशेवर संघर्ष को उजागर करता है, जो अब एक लोकप्रिय श्रृंखला के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है।
अभिनेताओं के लिए यह कहानी दृढ़ता और धैर्य का संदेश देती है, जो पारंपरिक टेलीविजन से डिजिटल युग में सफल संक्रमण का प्रतीक बन गई है।