📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tomasz Molina
धर्म
जालना में हड़ताल शुरू करने वाले कार्यकर्ता ने ब्राह्मण समुदाय की शिक्षा के लिए ₹1,000 करोड़ की मांग की
✍️ Mid-Day
🗓 29 अग. 2026, 10:33 PM
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महाराष्ट्र के जालना में एक कार्यकर्ता ने ब्राह्मण समुदाय के लिए मुफ्त शिक्षा और ₹1,000 करोड़ के फंड की मांग करते हुए हड़ताल शुरू की।
जालना, महाराष्ट्र – मंगलवार को एक स्थानीय कार्यकर्ता ने जिला कलेक्टर के कार्यालय के सामने उपवास शुरू किया, जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समुदाय के लिए मुफ्त शिक्षा हेतु ₹1,000 करोड़ का विशेष फंड मांगा। इस हड़ताल में भाग लेने वाले ने बताया कि यह मांग समुदाय को शैक्षिक असमानताओं से बचाने के उद्देश्य से है।
कार्यकर्ता ने कहा कि सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को लिखित रूप में स्वीकार कर फंड आवंटित किए जाने तक वह उपवास जारी रखेंगे। उन्होंने राजनेताओं, नागरिक समाज और मीडिया से इस मुद्दे को उजागर करने का आग्रह किया, यह बताते हुए कि फंड से छात्रवृत्ति, स्कूल बुनियादी ढांचा और ट्यूशन फीस का खर्च उठाया जाएगा।
जिला अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस हड़ताल की सूचना मिली है, पर उन्होंने इस विशेष मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की। अभी तक किसी अन्य समूह ने इस विरोध को समर्थन या विरोध नहीं किया है।
इस कदम पर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है; कुछ ने संवाद की बात कही, जबकि अन्य ने कहा कि जाति-आधारित फंड आवंटन से विवादास्पद precedent स्थापित हो सकता है। कार्यकर्ता ने कहा कि सरकार की लिखित प्रतिबद्धता मिलने पर ही वह उपवास समाप्त करेंगे।
स्थिति अभी विकसित हो रही है, और अधिकारी उपवास करने वाले की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, साथ ही इस मांग के राज्य की शिक्षा नीतियों पर संभावित प्रभाव का मूल्यांकन कर रहे हैं।
कार्यकर्ता ने कहा कि सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को लिखित रूप में स्वीकार कर फंड आवंटित किए जाने तक वह उपवास जारी रखेंगे। उन्होंने राजनेताओं, नागरिक समाज और मीडिया से इस मुद्दे को उजागर करने का आग्रह किया, यह बताते हुए कि फंड से छात्रवृत्ति, स्कूल बुनियादी ढांचा और ट्यूशन फीस का खर्च उठाया जाएगा।
जिला अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस हड़ताल की सूचना मिली है, पर उन्होंने इस विशेष मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की। अभी तक किसी अन्य समूह ने इस विरोध को समर्थन या विरोध नहीं किया है।
इस कदम पर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है; कुछ ने संवाद की बात कही, जबकि अन्य ने कहा कि जाति-आधारित फंड आवंटन से विवादास्पद precedent स्थापित हो सकता है। कार्यकर्ता ने कहा कि सरकार की लिखित प्रतिबद्धता मिलने पर ही वह उपवास समाप्त करेंगे।
स्थिति अभी विकसित हो रही है, और अधिकारी उपवास करने वाले की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी कर रहे हैं, साथ ही इस मांग के राज्य की शिक्षा नीतियों पर संभावित प्रभाव का मूल्यांकन कर रहे हैं।