📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / LittleJerry
विज्ञान
असम-नागालैंड सीमा पर बचाए गए 86 दुर्लभ गेको छिपकलियाँ, दो अभी भी हिरासत में
✍️ India Today NE
🗓 22 सित. 2026, 09:01 PM
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संरक्षण टीमों ने असम‑नागालैंड सीमा के पास 86 दुर्लभ गेको छिपकलियों को बचाया, दो को आगे की जाँच के लिए हिरासत में रखा गया।
संरक्षण अधिकारियों ने बताया कि असम‑नागालैंड सीमा के वनाच्छादित क्षेत्र में कार्यरत एक टीम ने 86 दुर्लभ गेको छिपकलियों को बचाया। यह बचाव स्थानीय वन विभागों के सहयोग से किया गया, जिसका उद्देश्य इन जीवों को अवैध वन्यजीव व्यापार से बचाना था।
इन छिपकलियों की प्रजाति अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सूची में ‘विक्टिम’ (वulnerable) दर्ज है और यह केवल पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि इन जीवों की उपस्थिति स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बचाव के दौरान दो छिपकलियों को जब्त कर वन्यजीव प्राधिकरणों ने हिरासत में ले लिया। प्रारम्भिक जांच से पता चलता है कि ये दो जीव संभवतः विदेशी पालतू बाजार के लिये अवैध रूप से एकत्र किए जा रहे थे।
वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी डॉ. रंजीत शर्मा ने कहा कि यह त्वरित कार्रवाई उत्तरपूर्व में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि बचाए गए गेको को पुनर्वास केंद्र में ले जाया जाएगा जहाँ उन्हें चिकित्सीय देखभाल के बाद फिर से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता की सुरक्षा में सहयोग मिल सके।
इन छिपकलियों की प्रजाति अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सूची में ‘विक्टिम’ (वulnerable) दर्ज है और यह केवल पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। विशेषज्ञों ने कहा कि इन जीवों की उपस्थिति स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बचाव के दौरान दो छिपकलियों को जब्त कर वन्यजीव प्राधिकरणों ने हिरासत में ले लिया। प्रारम्भिक जांच से पता चलता है कि ये दो जीव संभवतः विदेशी पालतू बाजार के लिये अवैध रूप से एकत्र किए जा रहे थे।
वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी डॉ. रंजीत शर्मा ने कहा कि यह त्वरित कार्रवाई उत्तरपूर्व में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी बताया कि बचाए गए गेको को पुनर्वास केंद्र में ले जाया जाएगा जहाँ उन्हें चिकित्सीय देखभाल के बाद फिर से उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता की सुरक्षा में सहयोग मिल सके।