📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anup Sadi
अपराध
गयाजी जंक्शन पर रिषिकेश-दून एक्सप्रेस से बरामद 45 जीवित कछुए, तस्करी जांच शुरू
✍️ Amar Ujala · Gaya
🗓 16 सित. 2026, 12:15 PM
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गयाजी जंक्शन पर आरपीएफ, जीआरपी और सीपीडीएस की संयुक्त जाँच में रिषिकेश‑दून एक्सप्रेस के स्लीपर कोच से दो झोलों और एक पिट्ठू बैग में 45 जीवित कछुए बरामद किए गए।
बिहार के गयाजी जंक्शन में आरपीएफ, जीआरपी और सीपीडीएस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान रिषिकेश‑दून एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में दो झोलों और एक पिट्ठू बैग में 45 जीवित कछुए बरामद किए गए। कछुओं की हालत लावारिस पाई गई, जिससे तुरंत पशु चिकित्सकीय देखभाल प्रदान की गई।
प्राधिकरणों ने इस मामले को वन्यजीव तस्करी के संदर्भ में आपराधिक जांच शुरू कर दी है। रेलगाड़ी में कछुओं को ले जाने का प्रयास राज्य सीमाओं के पार संरक्षित प्रजातियों को परिवहन करने की कोशिश दर्शाता है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। जांचकर्ता बैग के स्रोत का पता लगाने और यात्रियों व रेल कर्मचारियों से पूछताछ करने में लगे हैं।
यह बरामदगी भारत के विस्तृत रेल नेटवर्क का दुरुपयोग करके चल रहे अवैध वन्यजीव व्यापार पर नई चेतावनी देती है। अधिकारियों ने लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा जांच को कड़ा करने और वन विभाग के साथ सहयोग बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया है।
अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, पर मामला आगे की कार्रवाई के लिए राज्य अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। बचाए गए कछुओं को पुनर्वास केंद्र में भेजा जाएगा, जहाँ उनका उपचार कर उपयुक्त समय पर पुनःजंगली में छोड़ा जाएगा।
प्राधिकरणों ने इस मामले को वन्यजीव तस्करी के संदर्भ में आपराधिक जांच शुरू कर दी है। रेलगाड़ी में कछुओं को ले जाने का प्रयास राज्य सीमाओं के पार संरक्षित प्रजातियों को परिवहन करने की कोशिश दर्शाता है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है। जांचकर्ता बैग के स्रोत का पता लगाने और यात्रियों व रेल कर्मचारियों से पूछताछ करने में लगे हैं।
यह बरामदगी भारत के विस्तृत रेल नेटवर्क का दुरुपयोग करके चल रहे अवैध वन्यजीव व्यापार पर नई चेतावनी देती है। अधिकारियों ने लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा जांच को कड़ा करने और वन विभाग के साथ सहयोग बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया है।
अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, पर मामला आगे की कार्रवाई के लिए राज्य अपराध शाखा को सौंप दिया गया है। बचाए गए कछुओं को पुनर्वास केंद्र में भेजा जाएगा, जहाँ उनका उपचार कर उपयुक्त समय पर पुनःजंगली में छोड़ा जाएगा।