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41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ेके समापनसमारोह में एम्स पटनाआई बैंक द्वारानेत्रदा परिवारोंका किया गया सम्मान
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पटना एम्स में 41वें नेत्रदान पखवाड़ेके समापन के अवसर पर एम्स पटनाआई बैंक द्वारानेत्रदाता परिवारों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया
पटना एम्स से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के समापन समारोह में एम्स पटन आई बैंक द्वारा नेत्रदाता परिवारों कासम्मान तथा नर्सिंग कर्मियों एवं आई बैंक काउंसलरों के योगदान का अभिनंदन
एम्स पटना आई बैंक द्वारा 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े (25 अगस्त से 08 सितंबर 2026) के दौरान नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़ी भ्रांतियों एवं मिथकों को दूर करने तथा स्वैच्छिक नेत्रदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित मरीजों के लिए दृष्टि बहाली की संभावनाओं को बढ़ाना था।
पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रमुख गतिविधियों में शामिल थे... नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा, मरीजों एवं उनके परिजनों के बीच नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम, पटना के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर/स्लोगन निर्माण प्रतियोगिता तथा आईपीडी फोयर क्षेत्र में पोस्टर प्रदर्शनी, नेत्रदाता परिवार सम्मान समारोह एवं समापन समारोह।
समापन समारोह का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) अमित राज, प्रभारी, आई बैंक एवं प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, एम्स पटना, के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, नेत्रदाता परिवारों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा पखवाड़े के दौरान नेत्रदान जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की।
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एम्स पटना, ने नेत्र रोग विभाग एवं एम्स पटना आई बैंक द्वारा आयोजित निरंतर जागरूकता गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कॉर्नियल अंधत्व के बोझ को कम करने में सामुदायिक सहभागिता एवं स्वैच्छिक नेत्रदान के महत्व पर जोर दिया तथा सभी हितधारकों से इस नेक कार्य के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने एम्स पटना आई बैंक को मई 2025 में आई बैंक के संचालन के बाद अल्प अवधि में 112 नेत्रदान प्राप्त करने की उपलब्धि के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण नेत्रदाता परिवारों का सम्मान रहा। अपने प्रियजनों के नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के समक्ष मानवता एवं परोपकार की मिसाल प्रस्तुत करने वाले इन परिवारों को सम्मानित किया गया। इन परिवारों के निःस्वार्थ निर्णय की सराहना की गई, जिन्होंने नेत्रदान से जुड़े सामाजिक मिथकों एवं भ्रांतियों से ऊपर उठकर दूसरों के जीवन में दृष्टि, आशा और गरिमा का उपहार देने में योगदान दिया। एचसीआरपी के अंतर्गत विभिन्न वार्डों एवं आईसीयू में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। इन नर्सिंग कर्मियों ने संभावित नेत्रदाताओं की पहचान करने तथा समय पर कॉर्निया रिट्रीवल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्कृष्ट योगदान के लिए T11 आईसीयू, इमरजेंसी मेडिसिन को प्रथम पुरस्कार, T4 आईसीयू, ट्रामा सर्जरी को द्वितीय पुरस्कार तथा B6B एनेस्थीसिया आईसीयू को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, सभी सहभागी वार्डों एवं आईसीयू को नेत्रदान एवं समय पर कॉर्निया रिट्रीवल में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
आई बैंक काउंसलरों को भी उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने नेत्रदाता परिवारों की संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग करने, सहमति प्राप्त करने तथा नेत्रदान एवं कॉर्निया रिट्रीवल की पूरी प्रक्रिया के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पखवाड़े के दौरान विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए पोस्टर एवं स्लोगन निर्माण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। पटना के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने रचनात्मक पोस्टरों एवं संदेशों के माध्यम से नेत्रदान, करुणा एवं दृष्टि के उपहार का संदेश दिया।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जैराज कमल, डॉन बास्को पब्लिक स्कूल, पटना को, द्वितीय पुरस्कार रिधिमा रंजन, डॉन बास्को पब्लिक स्कूल, पटना को तथा तृतीय पुरस्कार अन्वी शर्मा, दिल्ली पब्लिक स्कूल पटना को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में इन विद्यालयों के साथ-साथ अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। चयनित पोस्टरों को बाद में एम्स पटना के आईपीडी फोयर क्षेत्र में प्रदर्शित किया गया।
अपने विशेष संबोधनों में प्रो. (डॉ.) पूनम भदानी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक); प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, अधिष्ठाता छात्र मामले प्रो. (डॉ.) संजय पांडे, अधिष्ठाता (अनुसंधान); प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार, अधिष्ठाता (परीक्षा); तथा प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, ने सामाजिक परिवर्तन में विद्यार्थियों एवं युवा नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शैक्षणिक जीवन में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा स्वैच्छिक नेत्रदान एवं सामुदायिक सहभागिता की संस्कृति विकसित करने के लिए आई बैंक के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में नेत्र बैंकिंग एवं कॉर्नियल प्रत्यारोपण सेवाओं को और मजबूत तथा सुलभ बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित कुमार, सह प्राध्यापक, नेत्र रोग विभाग, द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. सोनी सिन्हा, अपर प्राध्यापक; डॉ. भावेश चंद्र साहा, अपर प्राध्यापक; तथा डॉ. देव कांत, सह प्राध्यापक, सहित विभाग के संकाय सदस्य, वरिष्ठ रेजिडेंट, कनिष्ठ रेजिडेंट, इंटर्न, ऑप्टोमेट्रिस्ट, आई बैंक टेक्नीशियन-कम-काउंसलर, नर्सिंग अधिकारी एवं एम्स पटना के सहयोगी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें प्रो. (डॉ.) अमित पाटिल, प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार, प्रो. (डॉ.) एम. हक, प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार, प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय, डॉ. दिवेंदु भूषण, प्रो. (डॉ.) रविकीर्ति प्रो. (डॉ.) भास्कर ठाकुरिया सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने एवं स्वैच्छिक नेत्रदान को प्रोत्साहित करने की सामूहिक शपथ ली। इस अवसर ने यह संदेश सुदृढ़ किया कि नेत्रदान एक ऐसा अमूल्य एवं कालातीत उपहार है, जो कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन में दृष्टि, गरिमा एवं आशा वापस ला सकता है।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सोनी सिन्हा, अपर प्राध्यापक, नेत्र रोग विभाग, द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यकारी निदेशक, संकाय सदस्यों, नेत्रदाता परिवारों, विद्यार्थियों, नर्सिंग अधिकारियों, आई बैंक टीम तथा सभी सहभागी विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया और 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े को सफल एवं सार्थक बनाने में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
इन विभिन्न पहलों के माध्यम से पटना आई बैंक ने नेत्रदान एवं कॉर्नियल प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत करने तथा क्षेत्र को टाली जा सकने वाली कॉर्नियल अंधता से मुक्त बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
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41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के समापन समारोह में एम्स पटन आई बैंक द्वारा नेत्रदाता परिवारों कासम्मान तथा नर्सिंग कर्मियों एवं आई बैंक काउंसलरों के योगदान का अभिनंदन
एम्स पटना आई बैंक द्वारा 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े (25 अगस्त से 08 सितंबर 2026) के दौरान नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने, इससे जुड़ी भ्रांतियों एवं मिथकों को दूर करने तथा स्वैच्छिक नेत्रदान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित मरीजों के लिए दृष्टि बहाली की संभावनाओं को बढ़ाना था।
पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रमुख गतिविधियों में शामिल थे... नेत्रदान जागरूकता पदयात्रा, मरीजों एवं उनके परिजनों के बीच नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम, पटना के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर/स्लोगन निर्माण प्रतियोगिता तथा आईपीडी फोयर क्षेत्र में पोस्टर प्रदर्शनी, नेत्रदाता परिवार सम्मान समारोह एवं समापन समारोह।
समापन समारोह का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) अमित राज, प्रभारी, आई बैंक एवं प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, एम्स पटना, के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, नेत्रदाता परिवारों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा पखवाड़े के दौरान नेत्रदान जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की।
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, कार्यकारी निदेशक एम्स पटना, ने नेत्र रोग विभाग एवं एम्स पटना आई बैंक द्वारा आयोजित निरंतर जागरूकता गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कॉर्नियल अंधत्व के बोझ को कम करने में सामुदायिक सहभागिता एवं स्वैच्छिक नेत्रदान के महत्व पर जोर दिया तथा सभी हितधारकों से इस नेक कार्य के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने एम्स पटना आई बैंक को मई 2025 में आई बैंक के संचालन के बाद अल्प अवधि में 112 नेत्रदान प्राप्त करने की उपलब्धि के लिए बधाई दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण नेत्रदाता परिवारों का सम्मान रहा। अपने प्रियजनों के नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के समक्ष मानवता एवं परोपकार की मिसाल प्रस्तुत करने वाले इन परिवारों को सम्मानित किया गया। इन परिवारों के निःस्वार्थ निर्णय की सराहना की गई, जिन्होंने नेत्रदान से जुड़े सामाजिक मिथकों एवं भ्रांतियों से ऊपर उठकर दूसरों के जीवन में दृष्टि, आशा और गरिमा का उपहार देने में योगदान दिया। एचसीआरपी के अंतर्गत विभिन्न वार्डों एवं आईसीयू में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। इन नर्सिंग कर्मियों ने संभावित नेत्रदाताओं की पहचान करने तथा समय पर कॉर्निया रिट्रीवल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्कृष्ट योगदान के लिए T11 आईसीयू, इमरजेंसी मेडिसिन को प्रथम पुरस्कार, T4 आईसीयू, ट्रामा सर्जरी को द्वितीय पुरस्कार तथा B6B एनेस्थीसिया आईसीयू को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, सभी सहभागी वार्डों एवं आईसीयू को नेत्रदान एवं समय पर कॉर्निया रिट्रीवल में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
आई बैंक काउंसलरों को भी उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने नेत्रदाता परिवारों की संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग करने, सहमति प्राप्त करने तथा नेत्रदान एवं कॉर्निया रिट्रीवल की पूरी प्रक्रिया के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पखवाड़े के दौरान विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए पोस्टर एवं स्लोगन निर्माण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। पटना के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने रचनात्मक पोस्टरों एवं संदेशों के माध्यम से नेत्रदान, करुणा एवं दृष्टि के उपहार का संदेश दिया।
प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जैराज कमल, डॉन बास्को पब्लिक स्कूल, पटना को, द्वितीय पुरस्कार रिधिमा रंजन, डॉन बास्को पब्लिक स्कूल, पटना को तथा तृतीय पुरस्कार अन्वी शर्मा, दिल्ली पब्लिक स्कूल पटना को प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में इन विद्यालयों के साथ-साथ अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। चयनित पोस्टरों को बाद में एम्स पटना के आईपीडी फोयर क्षेत्र में प्रदर्शित किया गया।
अपने विशेष संबोधनों में प्रो. (डॉ.) पूनम भदानी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक); प्रो. (डॉ.) रुचि सिन्हा, अधिष्ठाता छात्र मामले प्रो. (डॉ.) संजय पांडे, अधिष्ठाता (अनुसंधान); प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार, अधिष्ठाता (परीक्षा); तथा प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, ने सामाजिक परिवर्तन में विद्यार्थियों एवं युवा नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने शैक्षणिक जीवन में सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा स्वैच्छिक नेत्रदान एवं सामुदायिक सहभागिता की संस्कृति विकसित करने के लिए आई बैंक के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में नेत्र बैंकिंग एवं कॉर्नियल प्रत्यारोपण सेवाओं को और मजबूत तथा सुलभ बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित कुमार, सह प्राध्यापक, नेत्र रोग विभाग, द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. सोनी सिन्हा, अपर प्राध्यापक; डॉ. भावेश चंद्र साहा, अपर प्राध्यापक; तथा डॉ. देव कांत, सह प्राध्यापक, सहित विभाग के संकाय सदस्य, वरिष्ठ रेजिडेंट, कनिष्ठ रेजिडेंट, इंटर्न, ऑप्टोमेट्रिस्ट, आई बैंक टेक्नीशियन-कम-काउंसलर, नर्सिंग अधिकारी एवं एम्स पटना के सहयोगी कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें प्रो. (डॉ.) अमित पाटिल, प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार, प्रो. (डॉ.) एम. हक, प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार, प्रो. (डॉ.) निशांत सहाय, डॉ. दिवेंदु भूषण, प्रो. (डॉ.) रविकीर्ति प्रो. (डॉ.) भास्कर ठाकुरिया सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने एवं स्वैच्छिक नेत्रदान को प्रोत्साहित करने की सामूहिक शपथ ली। इस अवसर ने यह संदेश सुदृढ़ किया कि नेत्रदान एक ऐसा अमूल्य एवं कालातीत उपहार है, जो कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन में दृष्टि, गरिमा एवं आशा वापस ला सकता है।
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सोनी सिन्हा, अपर प्राध्यापक, नेत्र रोग विभाग, द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यकारी निदेशक, संकाय सदस्यों, नेत्रदाता परिवारों, विद्यार्थियों, नर्सिंग अधिकारियों, आई बैंक टीम तथा सभी सहभागी विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया और 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े को सफल एवं सार्थक बनाने में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
इन विभिन्न पहलों के माध्यम से पटना आई बैंक ने नेत्रदान एवं कॉर्नियल प्रत्यारोपण सेवाओं को मजबूत करने तथा क्षेत्र को टाली जा सकने वाली कॉर्नियल अंधता से मुक्त बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
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