📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Puneetkardam102
अपराध
बिहार सीमा के पास 3‑साल के बच्चे की बलात्कार‑हत्या पर नेपाल में फांसी की सजा पर बहस
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 26 अग. 2026, 01:34 AM
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बिहार सीमा के पास 3 साल के बच्चे की बलात्कार‑हत्या ने नेपाल में फांसी की सजा को फिर से लागू करने की मांगें बढ़ा दी हैं।
बिहार सीमा के निकट नेपाल के एक दूरस्थ इलाके में तीन साल की उम्र के बच्चे की बलात्कार‑हत्या का मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस ने मृत शिशु का शव बरामद किया और इसे नेपाल के दंड संहिता के तहत घोर अपराध मानते हुए हत्या की जांच शुरू कर दी है।
यह घटना नेपाल में 1997 में समाप्त किए गए फांसी की सजा पर पुनः बहस को भड़काती है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फांसी आधुनिक कानूनी मानकों के विरुद्ध है, जबकि कुछ राजनेता और पीड़ित अधिकार कार्यकर्ता इस कड़ी सजा की वापसी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अपराध की क्रूरता ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है।
अब तक किसी संदिग्ध की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच में सीमा सुरक्षा बलों का सहयोग शामिल है। नेपाल गृह मंत्रालय ने कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और निकट भविष्य में आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि फांसी की सजा को फिर से लागू करने के लिए संविधान में संशोधन और संसद की मंजूरी आवश्यक होगी, जिससे यह प्रक्रिया जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनती है।
इस त्रासदी ने सीमा के निकट के जिलों में सार्वजनिक विरोध भी उत्पन्न कर दिया है, जहाँ नागरिक तेज़ न्याय और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदमों की मांग कर रहे हैं।
यह घटना नेपाल में 1997 में समाप्त किए गए फांसी की सजा पर पुनः बहस को भड़काती है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फांसी आधुनिक कानूनी मानकों के विरुद्ध है, जबकि कुछ राजनेता और पीड़ित अधिकार कार्यकर्ता इस कड़ी सजा की वापसी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अपराध की क्रूरता ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया है।
अब तक किसी संदिग्ध की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच में सीमा सुरक्षा बलों का सहयोग शामिल है। नेपाल गृह मंत्रालय ने कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और निकट भविष्य में आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि फांसी की सजा को फिर से लागू करने के लिए संविधान में संशोधन और संसद की मंजूरी आवश्यक होगी, जिससे यह प्रक्रिया जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनती है।
इस त्रासदी ने सीमा के निकट के जिलों में सार्वजनिक विरोध भी उत्पन्न कर दिया है, जहाँ नागरिक तेज़ न्याय और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदमों की मांग कर रहे हैं।