📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Wikiperson7
शिक्षा
27 वर्षीय हर्षित संगुरी ने जंगल में नौ बच्चों को पढ़ाया
✍️ The Times of India
🗓 15 सित. 2026, 12:36 PM
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27 वर्षीय हर्षित संगुरी ने जंगल के रास्ते नौ बच्चों तक पहुँचकर पढ़ाई की, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौतियों पर प्रकाश पड़ा।
27 वर्षीय हर्षित संगुरी ने घने जंगल के रास्ते एक दूरस्थ बस्ते में रहने वाले नौ बच्चों तक पहुँचने के लिए लंबी पैदल यात्रा की। निकटवर्ती स्कूल की अनुपस्थिति के कारण इन बच्चों को मूलभूत शिक्षा नहीं मिल पाती, इसलिए संगुरी ने स्वयं को इस कार्य के लिए आगे बढ़ाया।
स्थानीय गैर‑सरकारी संगठन के स्वयंसेवक के रूप में कार्यरत संगुरी ने शिक्षण सामग्री और एक पोर्टेबल व्हाइटबोर्ड लेकर जंगल के छत्र के नीचे एक अस्थायी कक्षा स्थापित की। उन्होंने गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषय पढ़ाए, उपलब्ध सीमित संसाधनों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया।
यह घटना भारत के वनाच्छादित क्षेत्रों में शैक्षिक पहुँच की व्यापक समस्या को उजागर करती है, जहाँ बच्चों को स्कूल तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। NGOs और सरकारी एजेंसियां मोबाइल शिक्षण इकाइयों और सैटेलाइट स्कूलों के माध्यम से इस अंतर को कम करने की कोशिश कर रही हैं, पर ऐसे व्यक्तिगत प्रयास ही सबसे दूरस्थ छात्रों तक पहुँचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्थानीय गैर‑सरकारी संगठन के स्वयंसेवक के रूप में कार्यरत संगुरी ने शिक्षण सामग्री और एक पोर्टेबल व्हाइटबोर्ड लेकर जंगल के छत्र के नीचे एक अस्थायी कक्षा स्थापित की। उन्होंने गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषय पढ़ाए, उपलब्ध सीमित संसाधनों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किया।
यह घटना भारत के वनाच्छादित क्षेत्रों में शैक्षिक पहुँच की व्यापक समस्या को उजागर करती है, जहाँ बच्चों को स्कूल तक पहुँचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। NGOs और सरकारी एजेंसियां मोबाइल शिक्षण इकाइयों और सैटेलाइट स्कूलों के माध्यम से इस अंतर को कम करने की कोशिश कर रही हैं, पर ऐसे व्यक्तिगत प्रयास ही सबसे दूरस्थ छात्रों तक पहुँचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।