📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
स्वास्थ्य
239 दवाओं की गुणवत्ता जांच में फेल, हिमाचल में बने 83 को घोषित किया गया अधस्तरीय
✍️ Punjab Newsline
🗓 23 अग. 2026, 01:48 AM
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एक हालिया गुणवत्ता जांच में बताया गया कि 239 दवाओं ने मानक नहीं पूरे किए, जिनमें से 83 हिमाचल प्रदेश में निर्मित को अधस्तरीय घोषित किया गया।
पंजाब न्यूज़लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं की एक व्यवस्थित गुणवत्ता जांच में पाया गया कि 239 उत्पाद मानक नहीं पूरे कर पाए। इनमें से 83 बैच हिमाचल प्रदेश में निर्मित थे और उन्हें विशेष रूप से अधस्तरीय घोषित किया गया। यह परिणाम निर्माण प्रक्रियाओं में खामियों और नियामक प्राधिकरणों द्वारा कड़ी निगरानी की आवश्यकता को उजागर करता है। स्वास्थ्य अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे निरीक्षण को तेज़ करें और केवल मानक दवाओं को बाजार में पहुँचने दें। यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी के महत्व को रेखांकित करती है।
अधस्तरीय वर्गीकरण का अर्थ है कि प्रभावित दवाओं ने शक्ति, शुद्धता या सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं किया। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दवाओं की प्रामाणिकता की जाँच करें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को दें।
नियामक एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सुधारात्मक कदम उठाएँ, जिसमें दोषपूर्ण बैचों की रीकॉल और निर्माताओं पर दंड शामिल हो सकता है। यह घटना भारत भर में निर्माताओं को गूड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) का कड़ाई से पालन करने की याद दिलाती है।
अधस्तरीय वर्गीकरण का अर्थ है कि प्रभावित दवाओं ने शक्ति, शुद्धता या सुरक्षा के मानकों को पूरा नहीं किया। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दवाओं की प्रामाणिकता की जाँच करें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को दें।
नियामक एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सुधारात्मक कदम उठाएँ, जिसमें दोषपूर्ण बैचों की रीकॉल और निर्माताओं पर दंड शामिल हो सकता है। यह घटना भारत भर में निर्माताओं को गूड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) का कड़ाई से पालन करने की याद दिलाती है।