📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Ravan Khosa
Derivative work: Aristeas
धर्म
असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर 22 पश्चिम बंगाल के भक्तों ने 144 किलोग्राम रावण कांवड़ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़े
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 21 अग. 2026, 10:48 AM
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सावन के अंतिम दिनों में, पश्चिम बंगाल के 22 श्रद्धालु 144 किलोग्राम वजन वाला रावण कांवड़ लेकर बिहार के असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ से बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के 22 श्रद्धालुओं का एक जत्था 144 किलोग्राम वजन वाले अनोखे रावण कांवड़ को लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर रवाना हुआ है। यह यात्रा बिहार के असरगंज में स्थित कच्ची कांवरिया पथ से होकर गुजरती है, जो सावन के महीने में तीव्र भक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
जत्था ने इस हफ्ते अपने राज्य से प्रस्थान किया और भारी लकड़ी के कांवड़ को लेकर बिहार में प्रवेश किया। स्थानीय लोग इस दुर्लभ दृश्य को देखना चाहते हुए पथ के किनारे इकट्ठा हो गए और इसे आस्था व सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बताया।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रबंधकों ने इस समूह का स्वागत किया और कहा कि ऐसी यात्राएँ मंदिर की राष्ट्रीय महत्ता को और भी सुदृढ़ करती हैं। जत्था इस सप्ताह के अंत में देवघर के पवित्र परिसर तक पहुँचने की उम्मीद है, जहाँ कांवड़ को सावन के समापन समारोह में अर्पित किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने कांवड़ के वजन और कच्ची कांवरिया पथ की संकरी गलियों को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की है, ताकि यात्रा सुगमता से पूरी हो सके।
यह आयोजन बाबा बैद्यनाथ तीर्थयात्रा की निरंतर लोकप्रियता को उजागर करता है, जो सावन के बाद के चरण में भी दूर‑दराज़ के राज्य से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
जत्था ने इस हफ्ते अपने राज्य से प्रस्थान किया और भारी लकड़ी के कांवड़ को लेकर बिहार में प्रवेश किया। स्थानीय लोग इस दुर्लभ दृश्य को देखना चाहते हुए पथ के किनारे इकट्ठा हो गए और इसे आस्था व सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बताया।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रबंधकों ने इस समूह का स्वागत किया और कहा कि ऐसी यात्राएँ मंदिर की राष्ट्रीय महत्ता को और भी सुदृढ़ करती हैं। जत्था इस सप्ताह के अंत में देवघर के पवित्र परिसर तक पहुँचने की उम्मीद है, जहाँ कांवड़ को सावन के समापन समारोह में अर्पित किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने कांवड़ के वजन और कच्ची कांवरिया पथ की संकरी गलियों को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की है, ताकि यात्रा सुगमता से पूरी हो सके।
यह आयोजन बाबा बैद्यनाथ तीर्थयात्रा की निरंतर लोकप्रियता को उजागर करता है, जो सावन के बाद के चरण में भी दूर‑दराज़ के राज्य से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।