📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hans A. Rosbach
स्वास्थ्य
कोच्ची में मुफ्त हृदय शल्यक्रिया के लिए 20 झारखंड के बच्चों को भेजा गया
✍️ The Times of India
🗓 25 अग. 2026, 03:36 AM
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झारखंड के 20 बच्चों को मुफ्त हृदय शल्यक्रिया के लिए कोच्ची भेजा गया है, यह एक स्वास्थ्य पहल का हिस्सा है।
झारखंड के 20 बच्चों को कोच्ची में मुफ्त हृदय शल्यक्रिया के लिए भेजा गया है। यह कदम झारखंड की स्वास्थ्य प्राधिकरण और केरल के एक प्रमुख कार्डियक केंद्र के बीच सहयोग का परिणाम है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों का इलाज सुनिश्चित करना है। बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में यात्रा कराते हुए कोच्ची पहुँचने पर प्री‑ऑपरेटिव जांच कराई जाएगी। अस्पताल ने बताया कि शल्यक्रियाएँ आने वाले हफ्तों में निर्धारित की गई हैं और ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल के बाद बच्चे अपने गृह राज्य लौटेंगे। यह पहल अंतर‑राज्य सहयोग को दर्शाती है, जिससे विशेष उपचार तक पहुँच में सुधार हो रहा है।
परिवारों ने इस मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार के अवसर पर राहत व्यक्त की है, जो आर्थिक रूप से असंभव माना जाता था। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों ने पहले भी कई रोगियों को लाभ पहुँचाया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में हृदय रोग की बोझ कम हुआ है। कोच्ची के इस कार्डियक सेंटर को बाल हृदय शल्यक्रिया में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है और यह सभी प्रक्रियाएँ उन्नत सुविधाओं का उपयोग करके करेगा।
यह कदम भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों की व्यापक रणनीति को उजागर करता है, जिसमें देश भर के प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ साझेदारी करके तृतीयक देखभाल में अंतर को पाटने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों में अनियंत्रित हृदय रोगों से जुड़ी मृत्यु दर को घटाने में मददगार सिद्ध होंगी।
परिवारों ने इस मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार के अवसर पर राहत व्यक्त की है, जो आर्थिक रूप से असंभव माना जाता था। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों ने पहले भी कई रोगियों को लाभ पहुँचाया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में हृदय रोग की बोझ कम हुआ है। कोच्ची के इस कार्डियक सेंटर को बाल हृदय शल्यक्रिया में विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है और यह सभी प्रक्रियाएँ उन्नत सुविधाओं का उपयोग करके करेगा।
यह कदम भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों की व्यापक रणनीति को उजागर करता है, जिसमें देश भर के प्रतिष्ठित अस्पतालों के साथ साझेदारी करके तृतीयक देखभाल में अंतर को पाटने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों में अनियंत्रित हृदय रोगों से जुड़ी मृत्यु दर को घटाने में मददगार सिद्ध होंगी।