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19 सित. 2026
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स्वास्थ्य

1.9किलो के नवजात को मिली नई जिंदगी

✍️ रिपोर्टर: Awanish Kumar 🗓 19 सित. 2026, 09:00 PM 👁 20
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पटना एम्स में 1.9किलो वजन के नवजात को महाधमनि की रुकावट का सफल इलाज

पएम्स पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
1.9 किलो के नवजात को मिली नई जिंदगी, एम्स पटना में महाधमनी की गंभीर रुकावट का सफल इलाज

पटना, 19 सितंबर 2026

एम्स पटना के डॉक्टरों ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में सिर्फ 1.9 किलो वजन वाले समय से पहले जन्मे नवजात का सफल इलाज कर उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया। नवजात की महाधमनी में गंभीर रुकावट थी जिसके कारण शरीर के निचले हिस्से में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो गया था। इसके साथ ही बच्चे को सांस लेने में परेशानी, हृदय संबंधी जटिलता और गंभीर किडनी इंजरी भी हो गई थी।
बच्चे की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे लंबे समय तक नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में वेंटिलेटर पर रखा गया। महाधमनी में रुकावट के कारण किडनी तक भी पर्याप्त रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ जिससे पेशाब की मात्रा काफी कम हो गई। बच्चे को पेरिटोनियल डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी जिसे एनआईसीयू में ही किया गया।
बच्चे का वजन बेहद कम होने के कारण उसकी रक्त वाहिकाएं बहुत छोटी थीं। ऐसे में कैथेटर के माध्यम से उपचार करना चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती थी। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के डॉ. सूर्यनंदन प्रसाद ने अल्ट्रासाउंड की सहायता से सावधानीपूर्वक रक्त वाहिका तक पहुंच बनाई।
इसके बाद कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम भंभानी के नेतृत्व में टीम ने कैथेटर के माध्यम से बलून एंजियोप्लास्टी की। इस प्रक्रिया से महाधमनी की गंभीर रुकावट को खोला गया और शरीर के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह में सुधार हुआ।
प्रक्रिया के दौरान नियोनेटोलॉजी विभाग के डॉ. रिची दलई और डॉ. केशव कुमार पाठक तथा एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अभ्युदय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बच्चे की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी।
प्रक्रिया के बाद बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। रक्त प्रवाह बेहतर होने के साथ पेशाब की मात्रा बढ़ी और किडनी की कार्यक्षमता में भी सुधार आया। आवश्यकता के अनुसार पेरिटोनियल डायलिसिस जारी रखा गया जिसे डॉ. अर्नब घोरुई की देखरेख में किया गया।
बच्चे को कई सप्ताह तक एनआईसीयू में रखा गया। इस दौरान नियोनेटोलॉजी विभाग के चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने बच्चे के श्वसन, हृदय, किडनी और मेटाबॉलिक स्तर की लगातार निगरानी की। उपचार के बाद बच्चे की किडनी की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसकी सामान्य स्थिति भी बेहतर होती गई।
नियोनेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भबेश कांत चौधरी ने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के बीच समन्वित प्रयास और लंबे समय तक की गई गहन देखभाल से बच्चे को बचाना संभव हुआ। अब बच्चा डिस्चार्ज के लिए तैयार है।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम भंभनी ने बताया कि 1.9 किलो के नवजात में कैथेटर आधारित प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण थी। सफल बलून एंजियोप्लास्टी के बाद रक्त प्रवाह में सुधार हुआ और इससे बच्चे की रिकवरी में महत्वपूर्ण मदद मिली।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने बच्चे के सफल उपचार पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इतने कम वजन और गंभीर स्थिति वाले नवजात का सफल उपचार एम्स पटना की विशेषज्ञता, टीमवर्क और बहु-विषयक चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाता है।
कई सप्ताह तक चले गहन उपचार और निगरानी के बाद 1.9 किलो का यह नवजात अब चिकित्सकीय रूप से स्थिर है और स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। बच्चे के स्वस्थ होने से उसके माता-पिता के चेहरे पर भी राहत और खुशी लौट आई है।
यह सफल उपचार नियोनेटोलॉजी, कार्डियोलॉजी, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभागों के साथ-साथ एनआईसीयू की नर्सिंग एवं सपोर्ट टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
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