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04 अग. 2026
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1938 में खोजा गया कोएलेकथन: जीवित जीवाश्म जिसने दुनिया को चौंका दिया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Alberto Fernandez Fernandez
विज्ञान

1938 में खोजा गया कोएलेकथन: जीवित जीवाश्म जिसने दुनिया को चौंका दिया

✍️ The Times of India 🗓 03 अग. 2026, 08:39 PM 👁 2

1938 में, दक्षिण अफ़्रीकी मछुआरे ने सेंट पॉल के द्वीप के पास एक अजीब मछली पकड़ी, जिससे कोएलेकथन का पता चला, एक जीवित जीवाश्म जिसे 400 मिलियन वर्ष पहले विलुप्त माना जाता था।

1938 में, दक्षिण अफ़्रीकी मछुआरे हैरी मिलर ने सेंट पॉल के द्वीप के पास एक असामान्य मछली पकड़ी। बाद में इसे कोएलेकथन के रूप में पहचान मिली, एक जीवित जीवाश्म जिसे 400 मिलियन वर्ष पहले विलुप्त माना जाता था। इस खोज ने वैज्ञानिक समुदाय को चकित कर दिया और इसे बीसवीं शताब्दी के सबसे सनसनीखेज प्राकृतिक इतिहास घटनाओं में से एक माना गया।

कोएलेकथन की शारीरिक रचना—जैसे कि इसके पंख और जीवाश्मित खोपड़ी—डेवोनियन काल के प्राचीन मछलियों से मेल खाती है, जो प्राचीन इतिहास से एक जीवित संबंध स्थापित करती है। इसकी उपस्थिति ने यह दर्शाया कि कुछ प्रजातियाँ बड़े पैमाने पर विलुप्ति के बावजूद जीवित रह सकती हैं।

उसके बाद से शोधकर्ताओं ने कोएलेकथन के जीवविज्ञान, आनुवंशिकी और आवास का अध्ययन किया है। यह प्रजाति अब दक्षिण अफ़्रीका और इंडोनेशिया के तटों के गहरे पानी में पाई जाती है, और इसके संरक्षण के लिए प्रयास चल रहे हैं।

आज, कोएलेकथन महासागरों के नीचे छिपे रहस्यों का प्रतीक बना हुआ है, यह याद दिलाता है कि अतीत अभी भी अप्रत्याशित तरीकों से उभर सकता है।
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