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18 साल देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिक शांतिलाल मालवीय को तिरंगे में लपेटकर दी अंतिम विदाई ग्राम बैगंदा के वीर सपूत के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर, देशभक्ति के गीतों के बीच निकली अंतिम यात्रा
18 साल देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिक शांतिलाल मालवीय को तिरंगे में लपेटकर दी अंतिम विदाई ग्राम बैगंदा के वीर सपूत के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर, देशभक्ति के गीतों के बीच निकली अंतिम यात्रा
खबर खिलेडी के पास बैगंदा गांव की यहा के भारतीय सेना में 18 वर्षों तक सेवाएं देकर देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सेवानिवृत्त सैनिक श्री शांतिलाल जी मालवीय (इंदौर वाले) के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। ग्राम बैगंदा, तहसील बदनावर, जिला धार के इस वीर सपूत को तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई दी गई। देशभक्ति के गीतों के बीच निकली उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाजजन, परिजन और दूर-दराज से आए शुभचिंतक शामिल हुए। इस दौरान माहौल गमगीन हो गया और उपस्थित लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
18 वर्ष तक भारतीय सेना में दी सेवाएं
श्री शांतिलाल जी मालवीय ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित मिलिट्री इंजीनियरिंग कोर में सेवाएं देकर राष्ट्र की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। उन्होंने सेना में 18 वर्षों तक सेवा की और वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश वित्त विकास निगम, इंदौर में वाहन चालक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। यहां से भी वे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। अपने सेवाकाल में उन्होंने अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।
महानगर छोड़ पैतृक गांव में बिताया जीवन
शासकीय सेवाओं से निवृत्त होने के बाद श्री मालवीय ने इंदौर जैसे महानगर के बजाय अपने पैतृक गांव बैगंदा में परिवार के साथ रहना पसंद किया। उन्होंने सैनिक जीवन से मिले अनुशासन, संस्कार और आदर्शों को आजीवन अपनाए रखा। साथ ही सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन किया।
बच्चों को दिए उच्च शिक्षा और संस्कार
श्री शांतिलाल जी मालवीय ने अपने बच्चों को अच्छे संस्कारों के साथ उच्च शिक्षा प्रदान की। उनकी एकमात्र पुत्री चिकित्सक हैं और अपने चिकित्सक पति के साथ समाजसेवा में योगदान दे रही हैं। वहीं, उनके दोनों पुत्रों ने भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की राह अपनाई। परिवार को अच्छे संस्कार और शिक्षा देना उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा।
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को दी अंतिम विदाई
ग्राम बैगंदा स्थित उनके निज निवास से सुबह 11 बजे अंतिम यात्रा निकाली गई। पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ था। देशभक्ति के गीतों के बीच आगे बढ़ती अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से अपने प्रियजन को विदाई दी।
श्री मालवीय स्वर्गीय राधेश्याम जी के छोटे भाई, स्वर्गीय बंस्तीलाल जी एवं श्री आनंदीलाल जी के बड़े भाई तथा श्री ओमप्रकाश (महेश) और उपेंद्र (बबलू) मालवीय के पूज्य पिता थे।
उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके मिलनसार स्वभाव, राष्ट्रप्रेम और अनुशासित जीवन के प्रति लोगों के सम्मान और आत्मीयता को प्रदर्शित किया। देश की सेवा में समर्पित उनका जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
18 वर्ष तक भारतीय सेना में दी सेवाएं
श्री शांतिलाल जी मालवीय ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित मिलिट्री इंजीनियरिंग कोर में सेवाएं देकर राष्ट्र की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। उन्होंने सेना में 18 वर्षों तक सेवा की और वर्ष 1991 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश वित्त विकास निगम, इंदौर में वाहन चालक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। यहां से भी वे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। अपने सेवाकाल में उन्होंने अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।
महानगर छोड़ पैतृक गांव में बिताया जीवन
शासकीय सेवाओं से निवृत्त होने के बाद श्री मालवीय ने इंदौर जैसे महानगर के बजाय अपने पैतृक गांव बैगंदा में परिवार के साथ रहना पसंद किया। उन्होंने सैनिक जीवन से मिले अनुशासन, संस्कार और आदर्शों को आजीवन अपनाए रखा। साथ ही सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन किया।
बच्चों को दिए उच्च शिक्षा और संस्कार
श्री शांतिलाल जी मालवीय ने अपने बच्चों को अच्छे संस्कारों के साथ उच्च शिक्षा प्रदान की। उनकी एकमात्र पुत्री चिकित्सक हैं और अपने चिकित्सक पति के साथ समाजसेवा में योगदान दे रही हैं। वहीं, उनके दोनों पुत्रों ने भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की राह अपनाई। परिवार को अच्छे संस्कार और शिक्षा देना उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा।
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को दी अंतिम विदाई
ग्राम बैगंदा स्थित उनके निज निवास से सुबह 11 बजे अंतिम यात्रा निकाली गई। पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ था। देशभक्ति के गीतों के बीच आगे बढ़ती अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से अपने प्रियजन को विदाई दी।
श्री मालवीय स्वर्गीय राधेश्याम जी के छोटे भाई, स्वर्गीय बंस्तीलाल जी एवं श्री आनंदीलाल जी के बड़े भाई तथा श्री ओमप्रकाश (महेश) और उपेंद्र (बबलू) मालवीय के पूज्य पिता थे।
उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके मिलनसार स्वभाव, राष्ट्रप्रेम और अनुशासित जीवन के प्रति लोगों के सम्मान और आत्मीयता को प्रदर्शित किया। देश की सेवा में समर्पित उनका जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा।