18 करोड़ के छींगरी नदी विकास कार्य पर उठे सवाल, क्या बाढ़ का दबाव झेल पाएंगे पत्थर और रेलिंग?
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518 करोड़ के छींगरी नदी विकास कार्य पर उठे सवाल, क्या बाढ़ का दबाव झेल पाएंगे पत्थर और रेलिंग? नाला बन चुकी नदी के कायाकल्प पर खर्च हुई बड़ी राशि, बारिश और बाढ़ में काम की मजबूती की होगी असली परीक्षा
18 करोड़ के छींगरी नदी विकास कार्य पर उठे सवाल, क्या बाढ़ का दबाव झेल पाएंगे पत्थर और रेलिंग?
नाला बन चुकी नदी के कायाकल्प पर खर्च हुई बड़ी राशि, बारिश और बाढ़ में काम की मजबूती की होगी असली परीक्षा
नरसिंहपुर | रिपोर्ट: विकास सियारिया
नरसिंहपुर जिले में छींगरी नदी के कायाकल्प एवं विकास कार्य को लेकर अब निर्माण की गुणवत्ता और भविष्य में बाढ़ के दौरान इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। नकटुआ, मगरदा और रोसरा तीनों पंचायत क्षेत्रों में मिलाकर करीब 18 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाने की बात सामने आई है। नदी का स्वरूप लंबे समय से नाले जैसा होने के बाद यहां साफ-सफाई, पत्थरों से संरचना निर्माण और रेलिंग सहित विभिन्न कार्य किए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नदी में बरसात के दौरान तेज बहाव और जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है, वहां लगाए गए पत्थरों और बनाई गई अन्य संरचनाओं की तकनीकी मजबूती कितनी है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि भविष्य में नदी में बाढ़ का दबाव बढ़ता है तो क्या पत्थरों की संरचना अपनी जगह कायम रह पाएगी? क्या रेलिंग और नदी किनारे किए गए निर्माण कार्य तेज बहाव का दबाव झेलने के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाए गए हैं?
18 करोड़ की राशि में वास्तव में क्या-क्या हुआ?
इस पूरे मामले में सबसे पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि करीब 18 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में कौन-कौन से कार्य स्वीकृत किए गए, उनकी मात्रा क्या थी और प्रत्येक कार्य पर कितनी राशि निर्धारित की गई?
साथ ही यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि नदी में लगाए गए पत्थरों की गुणवत्ता क्या है और उन्हें किस प्रकार की नींव या बेस पर स्थापित किया गया है।
दस्तावेजों से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर
कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता की जांच के लिए DPR, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका (MB), भुगतान विवरण और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
यह भी सवाल है कि काम पूरा होने के बाद किसी स्वतंत्र या थर्ड-पार्टी एजेंसी से गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया या नहीं।
बाढ़ आई तो जिम्मेदारी किसकी?
सबसे अहम सवाल भविष्य की सुरक्षा को लेकर है। यदि तेज बारिश या बाढ़ के दौरान नदी किनारे लगाए गए पत्थर खिसकते हैं, संरचना टूटती है या रेलिंग क्षतिग्रस्त होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या निर्माण एजेंसी की कोई डिफेक्ट लायबिलिटी या रखरखाव की व्यवस्था है?
नाला बन चुकी नदी के कायाकल्प पर खर्च हुई बड़ी राशि, बारिश और बाढ़ में काम की मजबूती की होगी असली परीक्षा
नरसिंहपुर | रिपोर्ट: विकास सियारिया
नरसिंहपुर जिले में छींगरी नदी के कायाकल्प एवं विकास कार्य को लेकर अब निर्माण की गुणवत्ता और भविष्य में बाढ़ के दौरान इसकी मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। नकटुआ, मगरदा और रोसरा तीनों पंचायत क्षेत्रों में मिलाकर करीब 18 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाने की बात सामने आई है। नदी का स्वरूप लंबे समय से नाले जैसा होने के बाद यहां साफ-सफाई, पत्थरों से संरचना निर्माण और रेलिंग सहित विभिन्न कार्य किए गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस नदी में बरसात के दौरान तेज बहाव और जलस्तर बढ़ने की स्थिति बन सकती है, वहां लगाए गए पत्थरों और बनाई गई अन्य संरचनाओं की तकनीकी मजबूती कितनी है?
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि भविष्य में नदी में बाढ़ का दबाव बढ़ता है तो क्या पत्थरों की संरचना अपनी जगह कायम रह पाएगी? क्या रेलिंग और नदी किनारे किए गए निर्माण कार्य तेज बहाव का दबाव झेलने के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाए गए हैं?
18 करोड़ की राशि में वास्तव में क्या-क्या हुआ?
इस पूरे मामले में सबसे पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि करीब 18 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि में कौन-कौन से कार्य स्वीकृत किए गए, उनकी मात्रा क्या थी और प्रत्येक कार्य पर कितनी राशि निर्धारित की गई?
साथ ही यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि नदी में लगाए गए पत्थरों की गुणवत्ता क्या है और उन्हें किस प्रकार की नींव या बेस पर स्थापित किया गया है।
दस्तावेजों से सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर
कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता की जांच के लिए DPR, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, माप पुस्तिका (MB), भुगतान विवरण और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं।
यह भी सवाल है कि काम पूरा होने के बाद किसी स्वतंत्र या थर्ड-पार्टी एजेंसी से गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया या नहीं।
बाढ़ आई तो जिम्मेदारी किसकी?
सबसे अहम सवाल भविष्य की सुरक्षा को लेकर है। यदि तेज बारिश या बाढ़ के दौरान नदी किनारे लगाए गए पत्थर खिसकते हैं, संरचना टूटती है या रेलिंग क्षतिग्रस्त होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या निर्माण एजेंसी की कोई डिफेक्ट लायबिलिटी या रखरखाव की व्यवस्था है?