Health
106 साल की उम्र में निधन हो गया है। कुछ साल पहले ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ के नारे के साथ वह सोशल मीडिया पर खूब
106 साल की उम्र में निधन हो गया है। कुछ साल पहले ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ के नारे के साथ वह सोशल मीडिया पर खूब
हरियाणा के रोहतक जिले के गांधरा गांव के रहने वाले दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हो गया है। कुछ साल पहले ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ के नारे के साथ वह सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। उस समय उनकी उम्र 102 साल थी और पेंशन बंद होने के बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने अनोखे अंदाज में अपनी बारात निकाली थी।
दुलीचंद का निधन शनिवार को हुआ। रविवार को गांधरा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी अनोखी बारात और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ उठाई गई आवाज की चर्चा होने लगी है।
दरअसल, 102 साल की उम्र में दुलीचंद की पेंशन बंद हो गई थी। बताया गया कि लाइफ सर्टिफिकेट से जुड़ी समस्या के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत मान लिया गया था। पेंशन बंद होने से परेशान दुलीचंद ने खुद को जीवित साबित करने का फैसला किया और अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए बारात निकाल दी।
इस बारात में दुलीचंद रथ पर सवार होकर निकले थे। उनके हाथों में कई तख्तियां थीं, जिन पर ‘मैं जिंदा हूं’ और ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ जैसे नारे लिखे थे। वह अपनी बारात लेकर उपायुक्त कार्यालय भी पहुंचे थे। उनके इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रियता हासिल कर ली थी।
दुलीचंद की कहानी ने सरकारी रिकॉर्ड में होने वाली गलतियों और पेंशन जैसी सुविधाओं के लिए आम लोगों को होने वाली परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा था। उनकी इस घटना के बाद वह इंटरनेट पर एक चर्चित चेहरा बन गए थे।
दुलीचंद की जिंदगी पर एक फिल्म भी बनाई गई थी, लेकिन इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दुलीचंद ने आरोप लगाया था कि उनकी अनुमति के बिना उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाई गई। परिवार की बात करें तो उनके छह बेटे और चार बेटियां थीं। बताया गया है कि उनके परिवार में करीब 70 सदस्य हैं। उनके निधन से परिवार और गांव में शोक का माहौल है।
दुलीचंद का निधन शनिवार को हुआ। रविवार को गांधरा गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके निधन के बाद एक बार फिर उनकी अनोखी बारात और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ उठाई गई आवाज की चर्चा होने लगी है।
दरअसल, 102 साल की उम्र में दुलीचंद की पेंशन बंद हो गई थी। बताया गया कि लाइफ सर्टिफिकेट से जुड़ी समस्या के कारण सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत मान लिया गया था। पेंशन बंद होने से परेशान दुलीचंद ने खुद को जीवित साबित करने का फैसला किया और अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए बारात निकाल दी।
इस बारात में दुलीचंद रथ पर सवार होकर निकले थे। उनके हाथों में कई तख्तियां थीं, जिन पर ‘मैं जिंदा हूं’ और ‘थारा फूफा अभी जिंदा है’ जैसे नारे लिखे थे। वह अपनी बारात लेकर उपायुक्त कार्यालय भी पहुंचे थे। उनके इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने देखते ही देखते सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रियता हासिल कर ली थी।
दुलीचंद की कहानी ने सरकारी रिकॉर्ड में होने वाली गलतियों और पेंशन जैसी सुविधाओं के लिए आम लोगों को होने वाली परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा था। उनकी इस घटना के बाद वह इंटरनेट पर एक चर्चित चेहरा बन गए थे।
दुलीचंद की जिंदगी पर एक फिल्म भी बनाई गई थी, लेकिन इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दुलीचंद ने आरोप लगाया था कि उनकी अनुमति के बिना उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाई गई। परिवार की बात करें तो उनके छह बेटे और चार बेटियां थीं। बताया गया है कि उनके परिवार में करीब 70 सदस्य हैं। उनके निधन से परिवार और गांव में शोक का माहौल है।