सरकारी योजना
1 अक्टूबर से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के नियमों में बड़ा बदलाव, जानिए किस देरी पर किस अधिकारी की मंजूरी जरूरी
दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत, एक साल से अधिक पुराने मामलों के लिए DM/SDM स्तर पर प्रक्रिया का प्रावधान
नई दिल्ली। जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराने को लेकर केंद्र सरकार ने नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। नए प्रावधानों में जन्म या मृत्यु की सूचना देर से देने के मामलों में प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और सख्त किया गया है।
देरी के हिसाब से अलग होगी प्रक्रिया
1. 0 से 21 दिन तक — सामान्य पंजीकरण जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित अवधि में देने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण किया जाएगा। संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार के स्तर पर प्रक्रिया पूरी होगी।
2. 21 दिन से 30 दिन तक — विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण 21 दिन के बाद लेकिन 30 दिन के भीतर सूचना देने पर विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण किया जा सकता है।
3. 30 दिन से 1 वर्ष तक — लिखित अनुमति आवश्यक 30 दिन से अधिक लेकिन एक वर्ष के भीतर सूचना देने पर जिला रजिस्ट्रार या निर्धारित प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बाद पंजीकरण होगा। दस्तावेजों और विलंब के कारण का सत्यापन किया जाएगा।
4. 1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष तक —
DM/SDM स्तर पर आदेश
नए नियमों के तहत एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) अथवा जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण किया जा सकेगा। संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की वास्तविकता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित शुल्क पर आदेश जारी कर सकते हैं।
5. 2 वर्ष से अधिक पुराने मामले — न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में अब पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश की आवश्यकता होगी। कानून में इस स्तर पर भी संबंधित घटना की सत्यता के सत्यापन और निर्धारित शुल्क का प्रावधान है।
1 अक्टूबर से इसलिए महत्वपूर्ण है बदलाव केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार संशोधन अधिनियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण में होने वाली देरी को कम करना और विलंबित पंजीकरण के मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
जरूरी सूचना: अलग-अलग राज्यों में आवेदन की प्रक्रिया, शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े नियम राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार हो सकते हैं। इसलिए प्रमाण पत्र बनवाने से पहले संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार/नगर निकाय/ग्राम पंचायत अथवा राज्य के अधिकृत पोर्टल से नवीनतम जानकारी लेना उचित होगा।
देरी के हिसाब से अलग होगी प्रक्रिया
1. 0 से 21 दिन तक — सामान्य पंजीकरण जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित अवधि में देने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण किया जाएगा। संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार के स्तर पर प्रक्रिया पूरी होगी।
2. 21 दिन से 30 दिन तक — विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण 21 दिन के बाद लेकिन 30 दिन के भीतर सूचना देने पर विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण किया जा सकता है।
3. 30 दिन से 1 वर्ष तक — लिखित अनुमति आवश्यक 30 दिन से अधिक लेकिन एक वर्ष के भीतर सूचना देने पर जिला रजिस्ट्रार या निर्धारित प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बाद पंजीकरण होगा। दस्तावेजों और विलंब के कारण का सत्यापन किया जाएगा।
4. 1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष तक —
DM/SDM स्तर पर आदेश
नए नियमों के तहत एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में जिलाधिकारी (DM), उपजिलाधिकारी (SDM) अथवा जिलाधिकारी द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण किया जा सकेगा। संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की वास्तविकता का सत्यापन करने के बाद निर्धारित शुल्क पर आदेश जारी कर सकते हैं।
5. 2 वर्ष से अधिक पुराने मामले — न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में अब पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश की आवश्यकता होगी। कानून में इस स्तर पर भी संबंधित घटना की सत्यता के सत्यापन और निर्धारित शुल्क का प्रावधान है।
1 अक्टूबर से इसलिए महत्वपूर्ण है बदलाव केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार संशोधन अधिनियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के पंजीकरण में होने वाली देरी को कम करना और विलंबित पंजीकरण के मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
जरूरी सूचना: अलग-अलग राज्यों में आवेदन की प्रक्रिया, शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े नियम राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार हो सकते हैं। इसलिए प्रमाण पत्र बनवाने से पहले संबंधित स्थानीय रजिस्ट्रार/नगर निकाय/ग्राम पंचायत अथवा राज्य के अधिकृत पोर्टल से नवीनतम जानकारी लेना उचित होगा।